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RBI के नए नियमों से बाजार में हलचल, कैपिटल मार्केट शेयरों में शुरुआती गिरावट

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RBI Rules : सोमवार 16 फरवरी की सुबह शेयर बाजार खुलते ही कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर बिकवाली का दबाव दिखा। निवेशकों की चिंता की वजह भारतीय रिजर्व बैंक के हालिया फैसले रहे। केंद्रीय बैंक ने कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरी के लिए कर्ज से जुड़े नियम कड़े कर दिए हैं, जिससे बाजार में सट्टा गतिविधियों पर अंकुश लगाने का संकेत मिला है। इसी आशंका के बीच शुरुआती कारोबार में कई प्रमुख स्टॉक्स फिसलते नजर आए।

Reserve Bank of India ने देर रात जारी बयान में साफ किया कि सिक्योरिटीज फर्मों को अब सभी क्रेडिट सुविधाओं के लिए पर्याप्त कोलैटरल देना होगा। साथ ही, अपने खाते पर ट्रेडिंग करने या ब्रोकरों द्वारा निवेश के लिए कर्ज उपलब्ध कराने पर रोक लगाई गई है।

RBI के नए नियमों से बाजार में हलचल

बता दें कि ये दिशा-निर्देश 1 अप्रैल से लागू होंगे और स्टॉक व कमोडिटी ब्रोकर जैसे इंटरमीडियरी पर सीधे असर डालेंगे। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इससे अत्यधिक लेवरेज आधारित ट्रेडिंग पर लगाम लगेगी। प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग में वित्तीय कंपनियां ग्राहकों की बजाय खुद के मुनाफे के लिए स्टॉक, बॉन्ड, करेंसी या डेरिवेटिव में पैसा लगाती हैं। पिछले साल के आंकड़े बताते हैं कि National Stock Exchange of India पर इक्विटी ऑप्शन कारोबार में ऐसी फर्मों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा रही।

कैश इक्विटी सेगमेंट में भी इनका हिस्सा करीब 30 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो दो दशक से अधिक का उच्च स्तर माना गया। ऐसे में नियामक को बाजार में बढ़ती सट्टेबाजी की चिंता सताने लगी थी।

किन शेयरों में दिखी गिरावट

सुबह करीब 10 बजे के आसपास के भाव देखें तो Angel One के शेयर लगभग 4 प्रतिशत टूटे। Billionbrains Garage Ventures (ग्रो) में करीब 3.5 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। वहीं BSE के शेयरों में लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। निवेशकों ने आशंका जताई कि सख्ती से इन कंपनियों की कमाई पर दबाव पड़ सकता है। हाल ही में डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रांजैक्शन टैक्स बढ़ाने के बाद यह दूसरा बड़ा कदम है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि लेवरेज सीमित हुआ तो ट्रेडिंग वॉल्यूम घट सकता है।

कुछ विशेषज्ञ इसे लंबी अवधि में स्थिर और पारदर्शी बाजार की दिशा में सकारात्मक कदम भी बता रहे हैं। फिलहाल, निवेशकों की नजर इस बात पर है कि 1 अप्रैल के बाद इन नियमों का वास्तविक असर कितना गहरा पड़ता है।

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