Ratan Tata Birthday 2025 : 28 दिसंबर का दिन भारतीय उद्योग जगत के लिए खास है। यही वह तारीख है, जब रतन टाटा का जन्म हुआ था। आज जब उनका नाम लिया जाता है तो सामने एक शांत, दूरदर्शी और ग्लोबल बिजनेस लीडर की छवि उभरती है। लेकिन इस चमक-दमक के पीछे एक ऐसी शुरुआत छिपी है, जिसे जानकर हर कोई हैरान रह जाता है। बहुत कम लोगों को पता है कि रतन टाटा ने अपने करियर की पहली सीढ़ी किसी कॉर्नर ऑफिस से नहीं, बल्कि फैक्ट्री के शोर भरे शॉप फ्लोर से चढ़ी थी। साल 1962 में रतन टाटा ने टाटा स्टील जॉइन किया। उस वक्त उन्हें न तो किसी खास पद की पेशकश हुई और न ही कोई विशेष सुविधा मिली।
जमशेदपुर प्लांट में उनकी तैनाती हुई, जहां उन्होंने मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। फावड़ा चलाना, चूना ढोना और गर्म भट्ठियों के बीच पसीना बहाना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बन गई थी।
Ratan Tata Birthday
शॉप फ्लोर पर बिताए गए उन दिनों में रतन टाटा ने यह जाना कि किसी भी संगठन की असली ताकत उसकी मशीनें या इमारतें नहीं, बल्कि वहां काम करने वाले लोग होते हैं। यही कारण रहा कि आगे चलकर जब वे नेतृत्व की भूमिका में आए, तो कर्मचारियों की भलाई उनके फैसलों का केंद्र बनी। कई मौकों पर मुनाफा कम होने के बावजूद कर्मचारियों के हितों से समझौता नहीं किया गया। शुरुआती दौर में उन्हें NELCO और एम्प्रेस मिल्स जैसी बीमार कंपनियों की जिम्मेदारी दी गई। हालात इतने खराब थे कि इन संस्थानों को पटरी पर लाना आसान नहीं था। आलोचनाएं हुईं… सवाल उठे और उनकी नेतृत्व क्षमता पर भी उंगली उठाई गई। रतन टाटा ने पीछे हटने के बजाय इन अनुभवों से सीखना चुना।
बदली टाटा समूह की दिशा
1981 में उन्हें टाटा इंडस्ट्रीज की कमान मिली और 1991 में वे पूरे टाटा समूह के चेयरमैन बने। इसके बाद टाटा समूह ने नया रास्ता पकड़ा। पुराने कारोबार से निकलकर आईटी, ऑटोमोबाइल और रिटेल जैसे भविष्य के क्षेत्रों में निवेश हुआ। इंडिका और फिर नैनो जैसी परियोजनाओं ने भारतीय उद्योग की क्षमता को दुनिया के सामने रखा। जिस व्यक्ति ने करियर की शुरुआत फावड़ा चलाकर की, वही आगे चलकर टाटा समूह को 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा की ऊंचाई तक ले गया। आज टाटा समूह की मार्केट वैल्यू 445 बिलियन डॉलर से अधिक है। वहीं, 9 अक्टूबर 2024 को रतन टाटा का निधन हो गया था, जिससे पूरे देश में शोक की लहर थी।
Read Mo: PAN-Aadhaar Link: 31 दिसंबर से पहले पैन-आधार लिंकिंग जरूरी, नहीं तो हो जाएगा इनएक्टिव





