Rajasthan News : राजस्थान में अक्षय ऊर्जा सेक्टर इन दिनों बड़े संकट से गुजर रहा है। यहां सोलर और अन्य रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स को भारी बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि पीक सोलर घंटों यानी सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक 4 गीगावाट से ज्यादा क्षमता वाले प्रोजेक्ट्स लगभग बंद जैसे हो जाते हैं। इससे निवेशकों और कंपनियों की चिंता लगातार बढ़ रही है।

12 दिसंबर को शुरू हुई खेतड़ी-नरेला ट्रांसमिशन लाइन से उम्मीद थी कि ग्रिड पर दबाव कम होगा, लेकिन हुआ इसका उल्टा। 15 दिसंबर 2025 को हुई बैठक में सामने आया कि बिजली कटौती और तेज हो गई है।
Rajasthan में सोलर पावर पर संकट
खासतौर पर T-GNA (अस्थायी नेटवर्क एक्सेस) के तहत चल रहे प्रोजेक्ट्स को पीक टाइम में लगभग 100 फीसदी कटौती झेलनी पड़ रही है। SPDA ने इस स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि ग्रिड में पहले से ही पर्याप्त ट्रांसमिशन मार्जिन होना चाहिए था। करीब 5.2 GW प्रोजेक्ट्स को कनेक्टिविटी दी गई थी, जिनमें से 4.4 GW चालू हैं। इसके बावजूद 4 GW क्षमता को सिर्फ नॉन-पीक घंटों में ही बिजली सप्लाई की अनुमति मिल रही है, जो समझ से परे है।
ग्रिड इंडिया ने बताए कारण
ग्रिड इंडिया के मुताबिक इस समस्या के पीछे कई तकनीकी कारण हैं। इनमें वोल्टेज का उतार-चढ़ाव, पूलिंग स्टेशनों पर कम शॉर्ट-सर्किट क्षमता, भादला-बीकानेर 400 kV लाइन पर लोड और 765 kV बीकानेर-खेतड़ी लाइन पर ज्यादा दबाव शामिल हैं। इन कारणों से ग्रिड की स्थिरता प्रभावित हो रही है। लगातार कटौती अब डेवलपर्स के लिए बड़ा आर्थिक जोखिम बन चुकी है। इससे प्रोजेक्ट की कमाई प्रभावित हो रही है और कर्ज चुकाने की क्षमता पर भी असर पड़ रहा है। लंबे समय तक प्लांट बंद रहने से जरूरी उपकरणों का सही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा, जिससे ग्रिड की स्थिरता पर भी खतरा बढ़ रहा है।
उठाए जा रहे ये कदम
स्थिति सुधारने के लिए कई उपायों पर चर्चा हुई है। इसमें डेवलपर्स के साथ डेटा साझा करना, नई ट्रांसमिशन लाइनों को जल्दी पूरा करना और भादला-बीकानेर लाइन का अपग्रेड शामिल है। इसके अलावा डायनामिक लाइन रेटिंग (DLR) जैसे आधुनिक तकनीकी उपायों पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि ग्रिड की क्षमता बेहतर हो सके। भारत ने 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए भारत सरकार के इस लक्ष्य पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो नए प्रोजेक्ट्स की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
स्टेकहोल्डर्स ने सरकार से तुरंत नीति और संचालन स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की है। आने वाले महीनों में नई ट्रांसमिशन लाइनों के शुरू होने से राहत मिलने की उम्मीद जरूर है, लेकिन फिलहाल हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और एजेंसियां इस संकट से कैसे निपटती हैं।
Read More : Cheapest Personal Loan: लेने से पहले जान लें ये जरूरी बातें




