Qatar : मिडिल ईस्ट में जारी टकराव अब और खतरनाक रूप लेता दिखाई दे रहा है। इजरायल, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव का सोमवार को दसवां दिन है। लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई के कारण पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है। हाल के दिनों में ईरान ने उन देशों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है, जिन्हें वह इजरायल और अमेरिका का समर्थक मानता है। इसी बीच कतर से आई खबर ने खाड़ी क्षेत्र में चिंता और बढ़ा दी है।
सोमवार को दोहा में अचानक कई तेज धमाकों की आवाज सुनाई दी। इन धमाकों के बाद शहर के कई इलाकों में लोगों के बीच घबराहट फैल गई। जंग का रुख कब और किस दिशा में बदल जाए, यह कहना मुश्किल है।
Qatar में धमाका
स्थानीय मीडिया और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के मुताबिक, यह घटनाएं ईरान की ओर से शुरू की गई व्यापक जवाबी कार्रवाई का हिस्सा हो सकती हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, धमाकों के बाद सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई।
दरअसल, हाल ही में इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद से ईरान ने जवाबी हमलों की रणनीति तेज कर दी है। माना जा रहा है कि इसी रणनीति के तहत खाड़ी क्षेत्र के कई देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिश की जा रही है। विश्लेषकों का कहना है कि इससे क्षेत्रीय संघर्ष का दायरा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ सकता है।
मिसाइल हमलों की आशंका
समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को दोहा में जो धमाके सुनाई दिए, वे ईरानी ड्रोन या मिसाइल हमलों से जुड़े हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि खाड़ी क्षेत्र में कई जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कतर की सरकार ने आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी नहीं दी है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां संभावित खतरे को देखते हुए लगातार हालात पर नजर रख रही हैं।
दागी गई नई मिसाइलें
इसी बीच ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB ने दावा किया है कि ईरान ने सोमवार को इजरायल की ओर मिसाइलों की नई खेप दागी है। रिपोर्ट में कहा गया कि इस कार्रवाई की शुरुआत नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में की गई। प्रसारण में यह भी कहा गया कि कब्जे वाले इलाकों की दिशा में मिसाइलों की पहली लहर छोड़ी गई है।
लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के कारण मिडिल ईस्ट में हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव इसी तरह जारी रहा तो इसका असर पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है। फिलहाल सभी देशों की नजरें आने वाले दिनों की घटनाओं पर टिकी हुई हैं।
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