कोरोना की तीसरी लहर में बच्चे संक्रमित हुए तो क्या करेंगे- SC

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भारत में पिछले 14 महीनों में एक अदृश्य दुश्मन ने दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को बेबस कर दिया है। महामारी ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को बेदम कर दिया है। लोग भयभीत और असुरक्षित हैं गंभीर बात ये है कि यह सब कुछ अभी थमा नहीं है सवाल यह खड़ा होता है क्या भारत कोरोना की तीसरी लहर का सामना कर पाएगा?कोरोना की दूसरी लहर से ही देश में हाहाकार मचा है और इसी बीच तीसरी लहर की बात ने सबको डरा दिया है, लेकिन बात डरने की नहीं है, अलर्ट रहने की है, खुद को बचाकर रखने की है। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजय राघवन ने कहा है कि जिस तरह से संक्रमण फैला हुआ है, उसे देखते हुए कोरोना की तीसरी लहर आना तय है। स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, ”हमें ये नहीं पता है कि तीसरी लहर कब आएगी लेकिन हमें कोविड-19 के प्रोटोकॉल को जारी रखते हुए इसके लिए तैयार रहना चाहिए। विजयराघवन कहते हैं कि नए म्यूटेंट से निपटने के लिए वैक्सीन को अपडेट करना ज़रूरी था. वह मानते हैं कि वायरस ने जब म्यूटेट करना शुरू किया उसके बावजूद इसके संक्रमण को रोकने के लिए लोगों द्वारा अपनाई जा रही सावधानियों में कोई बदलाव नहीं किया गया वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि देश को तीसरी लहर से निपटने के लिए तैयार रहने की जरूरत है। तीसरी लहर बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकती है इसलिए इस वर्ग के वैक्सीनेशन पर भी विचार होना चाहिए। इसके लिए वैज्ञानिक योजना की जरूरत है।!”



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