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PM Fasal Bima Yojana: बेमौसम बारिश से फसल बर्बाद? ऐसे उठाएं PM फसल बीमा योजना का फायदा

PM Fasal Bima Yojana Kisan
PM Fasal Bima Yojana Kisan

PM Fasal Bima Yojana : देश के कई हिस्सों में इन दिनों बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात से फसल खराब होने की खबरें सामने आई हैं। कई किसानों की पूरी सीजन की मेहनत एक झटके में खत्म हो गई है, जिससे उनकी आर्थिक हालत पर भी असर पड़ा है। ऐसे मुश्किल समय में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए राहत का सहारा बन सकती है।

PM Fasal Bima Yojana Kisan

इस योजना की शुरुआत साल 2016 में की गई थी। इसका मकसद प्राकृतिक आपदाओं की वजह से फसल नुकसान होने पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना है, ताकि उन्हें भारी नुकसान का सामना न करना पड़े।

PM Fasal Bima Yojana

इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को अपनी फसल का बीमा कराना होता है। बीमा होने के बाद अगर बारिश, ओलावृष्टि, बाढ़ या सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान होता है, तो बीमा कंपनी की ओर से मुआवजा दिया जाता है। इससे किसानों को नई फसल के लिए दोबारा खड़े होने में मदद मिलती है। इस योजना की खास बात यह है कि इसमें प्रीमियम दरें काफी कम रखी गई हैं। खरीफ फसलों के लिए करीब 2 फीसदी, रबी फसलों के लिए 1.5 फीसदी और व्यावसायिक फसलों के लिए 5 फीसदी प्रीमियम देना होता है। कम लागत में बड़ा सुरक्षा कवर मिलने की वजह से यह योजना किसानों के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है।

सभी प्रमुख फसलें शामिल

इस योजना के तहत धान, मक्का, बाजरा जैसी खरीफ फसलें और गेहूं, चना, जौ जैसी रबी फसलें कवर होती हैं। इसके अलावा कपास, गन्ना, आलू और प्याज जैसी व्यावसायिक फसलें भी बीमा के दायरे में आती हैं। यानी लगभग हर तरह की खेती करने वाले किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। किसान इस योजना के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। इसके अलावा, नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या कृषि विभाग के कार्यालय में जाकर भी आवेदन किया जा सकता है। आवेदन प्रक्रिया सरल रखी गई है ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इसका लाभ उठा सकें।

कैसे करें क्लेम

अगर फसल खराब हो जाती है, तो किसान को 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना देना जरूरी होता है। इसके लिए टोल-फ्री नंबर 14447 पर कॉल, व्हाट्सऐप नंबर पर मैसेज, मोबाइल ऐप या नजदीकी बैंक और कृषि कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। समय पर सूचना देने से क्लेम प्रक्रिया आसान हो जाती है।शिकायत मिलने के बाद बीमा कंपनी का प्रतिनिधि खेत का सर्वे करता है। नुकसान की जांच के बाद तय प्रक्रिया के अनुसार मुआवजा किसानों के खाते में भेजा जाता है। यह राशि नुकसान की भरपाई में मदद करती है और किसानों को आगे की खेती के लिए सहारा देती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम को देखते हुए किसानों को अपनी फसल का बीमा जरूर कराना चाहिए। इससे प्राकृतिक आपदा के समय आर्थिक सुरक्षा मिलती है और नुकसान का बोझ कम हो जाता है।

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