Guruvar Ke Upay:- सनातन धर्म में भगवान विष्णु की पूजा अर्चना बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ की जाती है। भगवान विष्णु को गुरुवार का दिन समर्पित है। अगर आप भी चाहते हैं कि आपका विवाह शीघ्र हो और संतान की प्राप्ति हो या नौकरी से जुड़ी समस्या हो अगर आप गुरुवार के दिन यह व्रत रखते हैं तो इससे आपकी यह सब समस्याएं समाप्त होती है। भगवान विष्णु की पूजा आराधना करने और गुरुवार का व्रत रखने से विवाहित महिलाएं और अविवाहित लड़कियां सबकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
गुरुवार को क्या करें?
गुरुवार के दिन अगर आप यह व्रत रखते हैं तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से की संतान दंपति को पुत्र रत्न की प्राप्त होती है और अविवाहित लड़कियों को सुयोग्यवर मिलते हैं। सुख-सौभाग्य की वृद्धि होती है और जीवन में खुशियों का भंडार मिल जाता है। गुरुवार का व्रत सुख समृद्धि और खुशहाली के लिए रखा जाता है इससे सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है जीवन में खुशियों का आगमन होता है।
श्री तुलसी जी की आरती
जय जय तुलसी माता, सबकी सुखदाता वर माता।
सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर,
रुज से रक्षा करके भव त्राता।
जय जय तुलसी माता…
बहु पुत्री है श्यामा, सूर वल्ली है ग्राम्या,
विष्णु प्रिय जो तुमको सेवे, सो नर तर जाता।
जय जय तुलसी माता…
हरि के शीश विराजत त्रिभुवन से हो वंदित,
पतित जनों की तारिणि, तुम हो विख्याता।
जय जय तुलसी माता…
लेकर जन्म बिजन में आई दिव्य भवन में,
मानव लोक तुम्हीं से सुख सम्पत्ति पाता।
जय जय तुलसी माता…
हरि को तुम अति प्यारी श्याम वर्ण सुकुमारी,
प्रेम अजब है श्री हरि का तुम से नाता।
जय जय तुलसी माता…
॥ आरती श्री जगदीशजी ॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे।
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।
स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे।
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे।
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
स्वमी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे।
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे।
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