बच्चों के वैक्सीनेशन पर बोले पेरेंट्स, पहले नेताओं के बच्चों को लगे कोरोना का टीका तभी बढ़ेगा भरोसा

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केंद्र सरकार ने बिहार सहित 7 राज्यों में बच्चों के वैक्सीनेशन को हरी झंडी दे दी है। इसके बाद से राज्य में तैयारी शुरू कर दी गई है। हेल्थ वर्करों को निडिल फ्री वैक्सीनेशन से लेकर सुरक्षा के हर ट्रिक की ट्रेनिंग देने की तैयारी चल रही है। अब तक राज्य के सभी जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारियों को पहले चरण में प्रशिक्षण दे दिया गया है। वैक्सीनेशन को लेकर दैनिक भास्कर ने गार्जियन से बात की है। जानिए, बच्चों के वैक्सीन को लेकर क्या आम लोगों की राय…

सामाजिक कायर्कर्ता शनी सिंह राजपूत का कहना है, ‘वैक्सीन लाने से पहले वैक्सीन पर विश्वास जमाना जरूरी है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैक्सीन ली तो लोगों का विश्वास बढ़ा। इसके बाद भी दूसरी डोज में लोग गंभीर नहीं है। पहले नेताओं के बच्चों और सेलिब्रिटी को वैक्सीन दी जानी चाहिए। इससे आम लोगों में विश्वास बढ़ जाएगा। बच्चों की वैक्सीन को लेकर सामान्य परिवार के गार्जियन काफी डरे हैं। हम लोग भी बचपन में वैक्सीन से ऐसे ही डरते थे। अब तक कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे लोगों का विश्वास पोलियो की तरह बढ़ाया जा सके। बड़ों की तरह बच्चों को भी डॉक्टर नेता और फ्रंटलाइन वर्क की तरह क्रमवार दिया जाए।

शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े राकेश का कहना है, ‘बड़ों की तरह ही वैक्सीन बच्चों को लगाई जाए। इसमें पहले डॉक्टरों, फ्रंटलाइन वर्करों और फिर नेताओं के बच्चों के बाद ही सामान्य लोगों के बच्चों को वैक्सीन दी जाए। सामान्य घरों के बच्चों को लेकर गार्जियन काफी डरे हैं। भरोसा बढ़ाने के लिए पक्ष-विपक्ष के बड़े नेता के बच्चों को भी आगे आना होगा।’

किदवई पुरी की रहने वाली कामकाजी महिला रितु चौबे का कहना है, ‘बच्चों की वैक्सीन आ रही है, यह खुशी की बात है। इसके पहले सरकार को विश्वास बढ़ाने को लेकर काम करना होगा। बेटी और बेटों को लगवाना है, लेकिन थोड़ा सा संशय है कि यह कितनी कारगर होगी। ऐसा न हो कि कोरोना से बचाव में भविष्य में कोई बड़ा संकट आ जाए। आनन-फानन में बनाई गई वैक्सीन को लेकर थोड़ी गंभीरता दिखाई जा रही है। कोई साइड इफेक्ट तो नहीं होगा। बच्चों को आगे चल कर कोई समस्या तो नहीं होगी, ये सब सवाल सुलझाने होंगे।’

पटना के राजीव नगर के निर्मल कुमार का कहना है, ‘कोरोना का टीका नहीं लगना चाहिए, क्योंकि इस पर बहुत संशय है। सरकार को पहले संशय दूर करना चाहिए। बहुत सारे सवाल हैं, जिससे लोग काफी भ्रमित हैं। समाज में जो भ्रांतियां है, उसे दूर किया जाए। पहले सरकार को विश्वास बनाना होगा, फिर लाना होगा। पोलियो से विश्वास जीता गया, लेकिन इसमें विश्वास नहीं है। दोनों डोज लेने के बाद भी लोग कोविड से परेशान है। अगर टीका लेने के बाद भी सुरक्षित नहीं है तो रिस्क लेने से क्या फायदा है।’

पटना के राजेंद्र नगर के रहने वाले सुमित झा का कहना है, ‘वैक्सीनेशन तो हर हाल में होना चाहिए। डिजीज ग्लोबली है और बच्चे सेफ तभी होंगे जब एक-एक बच्चे को वैक्सीनेट कर दिया जाएगा। ‘नो वन इज सेफ, अनटिल एव्रीवन इज सेफ’ का फंडा लेकर चलना होगा। गार्जियन पर बच्चों को लेकर जो मनोवैज्ञानिक दबाव है वह वैक्सीनेशन से ही दूर होगा।

बीमारी आती है तो सबसे पहले स्कूल और कोचिंग बंद होते हैं, लेकिन वैक्सीनेशन हो जाने के बाद ऐसा नहीं होगा। गार्जियन भी मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूत होंगे। स्कूल पर बीमारी किस तरह से असर डाल रही है यह किसी से छिपा नहीं है। वैक्सीन से ही डर को खत्म किया जा सकता है। बच्चों में इम्युनिटी ठीक होती है और वैक्सीन लगते ही यह बूस्टर का काम करेगी। दक्षिण अफ्रीका में बच्चों में ओमिक्रॉन दिखा है, लेकिन खतरा नहीं हुआ है। बच्चों को टीका लग जाएगा तो हमारे बच्चे पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएंगे।’

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