चिराग की ‘आशीर्वाद यात्रा’ पर चाचा पशुनति का तंज, बोले कोरोनाकाल में गायब थे और अब मांग रहे आशीर्वाद

एलजेपी के अंदर चिराग पासवान और बगावत करने वाले उनके सांसद चाचा पशुपति कुमार पारस के गुटों के बीच चल रही लड़ाई बढ़ती जा रही है। अब पारस गुट ने सीधे तौर पर चिराग पासवान की 5 जुलाई से शुरू हो रही आशीर्वाद यात्रा पर कटाक्ष किया है। यात्रा को कोरोना की पहली और दूसरी लहर से जोड़ दिया है। पारस गुट के प्रवक्ता श्रवण अग्रवाल ने सवाल उठाया है कि जब कोरोना वायरस का प्रकोप अपने चरम पर था, बिहार की जनता बेहतर इलाज, इंजेक्शन और ऑक्सीजन के लिए भटक रही थी तब चिराग पासवान कहां थे? अब उन्हें जनता की याद आई है? वो आशीर्वाद यात्रा निकाल रहे हैं? परेशान हुई जनता से वो किस आधार पर आशीर्वाद मांगने जा रहे हैं? इन सवालों का जवाब उन्हें देना होगा।

प्रवक्ता श्रवण अग्रवाल का कहना है कि कोरोना की लहर के दौरान परेशान जनता को मदद पहुंचाने के लिए उन्हें अपनी पार्टी के सभी सांसदों के साथ मीटिंग करनी चाहिए थी। क्षेत्र की जनता का हालचाल लेना चाहिए था। उन्हें पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ वर्चुअल तरीके से जुड़ना चाहिए था। सभी कार्यकर्ताओं को जनता को मदद पहुंचाने और उनकी सेवा के लिए निर्देश देना चाहिए था। LJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष व संसदीय दल के नेता होने के कारण चिराग पासवान की यह नैतिक जिम्मेदारी थी, लेकिन उन्होंने ऐसा किया नहीं। बिहार के लोगों की उन्होंने कोई सुध नहीं ली। पूरे बिहार की जनता को तो छोड़िए, उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र (जमुई) की जनता को बेसहारा छोड़ दिया था। ऐसी स्थिति में वो आशीर्वाद यात्रा निकालें या जो करें, इससे उनको कोई फायदा नहीं मिलने वाला है। जनता सब जान चुकी है और वो पशुपति कुमार पारस के साथ है।

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