जन्माष्टमी पर तेजप्रताप ने आवास में ही की भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, रात 12 बजे तक वीडियो कॉल पर लालू यादव भी रहे

तेजप्रताप यादव ने सोमवार की रात 12 बजे श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना की। जन्माष्टमी के अवसर पर पटना स्थित अपने सरकारी आवास में उन्होंने यह आयोजन किया। श्याम वर्ण श्रीकृष्ण को दूध से स्नान कराया। दिलचस्प यह है कि बीमार चल रहे लालू प्रसाद जिन्हें डॉक्टरों ने निर्देश दे रखा है कि रात में जल्दी सो जाया करें। वे भी रात्रि 12 बजे वॉट्सऐप के जरिए पूजा में शामिल रहे और बिस्तर से ही पूजा को देखते रहे। इस दौरान तेज प्रताप यादव उनसे बात भी करते रहे।

तेज प्रताप ने पहले कृष्ण की बाल मूर्ति और फिर मुरली बजाते कृष्ण को दुग्ध से पीतल के बड़े कटोरे में स्नान कराया। इसके बाद कृष्ण की अलग-अलग मूर्तियों को खूबसूरत रंगों के मोहक कपड़े पहनाए गए। मोरपंख और मुरली से सजाया। तेज ने कृष्ण की साज-सज्जा खुद से की। तेजप्रताप यादव खुद पीतांबर धारण किए दिखे। तेज प्रताप कृष्ण भक्त हैं। इसके लिए आवास में भी पूजा की उन्होंने अच्छी व्यवस्था कर रखी है। वृंदावन उनका पसंदीदा धार्मिक स्थल है। वे वहां अक्सर जाते रहते हैं। आवास पर आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह कार्यक्रम में उनके समर्थक भी जुटे रहे। इस अवसर पर श्रीकृष्ण के लिए खूबसूरत झूला भी लगाया गया था।

जन्माष्टमी की रात तेज प्रताप कृष्ण भक्ति में डूबे रहे। आरती, भजन और प्रसाद वितरण का कार्यक्रम पूरा किया। लालू प्रसाद के बेहतर स्वास्थ्य की कामना भी उन्होंने इस अवसर पर अपने आराध्य श्रीकृष्ण से की। लालू प्रसाद के बेहतर स्वास्थ्य के लिए वे वृंदावन से कथावाचक को बुलवाकर भागवत पाठ करवा चुके हैं।

तेजप्रताप यादव बिहार सरकार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री हैं और अभी हसनपुर से विधायक हैं। अपने बयानों की वजह से वे राजनीति में चर्चा में रहते हैं। वे खुद को सारथी कृष्ण और छोटे भाई तेजस्वी यादव को अर्जुन कहते रहे हैं। लेकिन हाल के दिनों में राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह को हिटलर कहने और संजय यादव को हटाने की मांग करने के बाद तेजस्वी यादव के साथ भी उनकी तनातनी है। तेज के खासमखास आकाश यादव को छात्र राजद के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा गगन कुमार को यह पद दे दिया गया। तेजप्रताप ने दिनकर की रश्मिरथी की पंक्तियां पोस्ट कर अपने मन की बात कही थी- ‘दो न्याय अगर तो आधा दो, पर, इसमें भी यदि बाधा हो, तो दे दो केवल पांच ग्राम, रक्खो अपनी धरती तमाम। हम वहीं खुशी से खायेंगे, परिजन पर असि न उठायेंगे!

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