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Mysterious Temple: भारत का अनोखा मंदिर, जहां हवा में लटका है खंभा!

Mysterious Temple
Mysterious Temple

Mysterious Temple : भारत की धरती मंदिरों से भरी पड़ी है, लेकिन कुछ मंदिर जो अपने आप में अनोखे होते हैं। आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित लेपाक्षी का वीरभद्र मंदिर भी उन्हीं खास जगहों में से एक है। यह मंदिर जितना धार्मिक है, उतना ही रहस्यमय और ऐतिहासिक भी है। पहली नजर में ही यह जगह आपको किसी और ही दुनिया में ले जाती है, जहां पत्थर बोलते हैं और दीवारें कहानियां सुनाती हैं। दरअसल, इस मंदिर का नाम लेपाक्षी मंदिर है, जो कि भगवान शिव के उग्र अवतार वीरभद्र को समर्पित है।

कहा जाता है कि जब दक्ष प्रजापति के यज्ञ में सती का अपमान हुआ था, तब भगवान शिव के क्रोध से वीरभद्र प्रकट हुए थे। उसी वीरभद्र की पूजा यहां बड़े ही श्रद्धा भाव से की जाती है। यह मंदिर चट्टानों को काटकर बनाया गया है। बता दें कि यह विजयनगर साम्राज्य की शानदार कला और शिल्प का बेहतरीन उदाहरण माना जाता है।

Mysterious लेपाक्षी मंदिर

लेपाक्षी मंदिर की दीवारों और छतों पर बनी भित्ति चित्र इसकी सबसे बड़ी पहचान हैं। इन चित्रों में रामायण, महाभारत और भगवान शिव से जुड़ी कई कथाएं दिखाई देती हैं। इतने साल बीतने के बाद भी इन चित्रों के रंग आज भी काफी हद तक सुरक्षित हैं। मंदिर में भगवान गणेश, नंदी, वीरभद्र, भद्रकाली, विष्णु और लक्ष्मी की सुंदर मूर्तियां भी स्थापित हैं। इस जगह से जुड़ी पौराणिक कथाएं भी इसे और खास बना देती हैं। मान्यता है कि लंका युद्ध के बाद घायल अवस्था में जटायु इसी स्थान पर गिरे थे। भगवान राम ने उन्हें देखकर कहा था “ले पक्षी”, यानी “उठो पक्षी”। इसी वाक्य से इस जगह का नाम लेपाक्षी पड़ा। मंदिर परिसर में एक जगह ऐसी भी बताई जाती है, जहां माता सीता के पैरों के निशान होने की श्रद्धा है।

मंदिर में है 70 खंभे

मंदिर में कुल करीब 70 पत्थर के खंभे हैं, लेकिन इनमें से एक खंभा जमीन को छूता ही नहीं है। उसके नीचे से आप कपड़ा या रुमाल आराम से निकाल सकते हैं। यह देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। अंग्रेजों के जमाने में भी इस खंभे का राज जानने की कोशिश की गई थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। आज तक यह सवाल बना हुआ है कि इतना भारी पत्थर बिना सहारे कैसे टिका हुआ है। धार्मिक और रहस्यमय होने के साथ-साथ यह मंदिर ऐतिहासिक रूप से भी बहुत अहम है। यहां की नक्काशी और स्थापत्य विजयनगर साम्राज्य की समृद्ध संस्कृति की गवाही देते हैं। मंदिर के एक कोने में एक गुफा भी है, जहां महर्षि अगस्त्य की तपस्या से जुड़ी मान्यता है।

ऐसे पहुंचे

लेपाक्षी सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। बेंगलुरु और हैदराबाद से बस और टैक्सी आसानी से मिल जाती है। नजदीकी रेलवे स्टेशन हिंदूपुर है और सबसे पास का एयरपोर्ट बेंगलुरु में स्थित है।

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