Home » मध्य प्रदेश » MPESB की नीतियों के खिलाफ जयस छात्र संगठन का आंदोलन, भर्ती परीक्षाओं में बदलाव से थे नाराज; भोपाल में फूटा युवाओं का गुस्सा

MPESB की नीतियों के खिलाफ जयस छात्र संगठन का आंदोलन, भर्ती परीक्षाओं में बदलाव से थे नाराज; भोपाल में फूटा युवाओं का गुस्सा

MPESB
MPESB

MPESB : मध्यप्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों-लाखों छात्र इन दिनों भर्ती प्रक्रिया को लेकर गहरी नाराज़गी जता रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर जयस छात्र संगठन ने इंदौर से लेकर भोपाल तक आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। संगठन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं किए गए तो राज्यभर के छात्र सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे। युवाओं का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में लगातार बदलाव और अस्पष्ट नियमों ने उनके भविष्य को असमंजस में डाल दिया है।

छात्रों का आरोप है कि मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) की परीक्षा प्रणाली में कई ऐसी व्यवस्थाएं लागू कर दी गई हैं जो अभ्यर्थियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही हैं।

MPESB की नीतियों के खिलाफ जयस छात्र संगठन का आंदोलन

नेगेटिव मार्किंग, नॉर्मलाइजेशन, कम पदों पर भर्ती और लगातार बढ़ती परीक्षा फीस जैसे मुद्दों ने छात्रों की परेशानी बढ़ा दी है। युवाओं का कहना है कि इन नियमों के कारण मेहनत करने के बावजूद उन्हें सही परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। इसके साथ ही चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। जयस छात्र संगठन ने सरकार को 30 दिन का समय दिया है। संगठन का कहना है कि अगर तय समय के भीतर इन मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो प्रदेशभर के छात्र भोपाल तक पैदल मार्च करेंगे। आंदोलन से जुड़े नेताओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल भर्ती नियमों में बदलाव की नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य की सुरक्षा की भी है। उनका दावा है कि अगर सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाया तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।

संगठन के नेताओं ने रखी बात

जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट लोकेश मुजाल्दा ने कहा कि राज्य के युवाओं के साथ भर्ती के नाम पर अन्याय हो रहा है। उनका मानना है कि युवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती प्रणाली मिलना उनका अधिकार है। वहीं, जयस के प्रदेश अध्यक्ष पवन डावर ने कहा कि लंबे समय से खाली पदों पर भर्ती नहीं होना और कम पदों पर विज्ञापन निकालना युवाओं के साथ अन्याय है। छात्र संगठनों का कहना है कि नॉर्मलाइजेशन और नेगेटिव मार्किंग जैसे नियमों का सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों को हो रहा है। डॉ. आंबेडकर छात्र संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राम सोलंकी और अन्य नेताओं ने कहा कि परीक्षा प्रणाली को सरल और न्यायसंगत बनाना बेहद जरूरी है ताकि हर वर्ग के छात्रों को बराबरी का अवसर मिल सके।

छात्रों की प्रमुख मांगें

छात्र संगठनों ने सरकार से कई अहम मांगें रखी हैं। इनमें नेगेटिव मार्किंग खत्म करना, ऑफलाइन वन-डे परीक्षा प्रणाली लागू करना, नॉर्मलाइजेशन नियम हटाना, परीक्षा केंद्र चुनने की सुविधा देना और परीक्षा फीस कम करना शामिल है। संगठनों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि युवाओं का भरोसा फिर से कायम हो सके।

Read More : NCLT ने अदाणी ग्रुप की योजना को दी मंजूरी, 5 कंपनियों का होगा पुनर्गठन

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Will the middle class get relief from the first general budget of Modi 3.0?