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MP के कूनो में फिर गूंजा ‘चीता प्रोजेक्ट’, बोत्सवाना से आए 9 मेहमान; संख्या पहुंची 48

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MP News : मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में शनिवार की सुबह अलग ही उत्साह लेकर आई। अफ्रीका के बोत्सवाना से लंबी हवाई यात्रा पूरी कर 9 नए चीते भारत पहुंचे और हेलीकॉप्टर के जरिए सीधे कूनो लाए गए। एयरलिफ्ट के बाद उन्हें तय प्रक्रिया के तहत क्वारंटीन बाड़ों में शिफ्ट कर दिया गया। इनकी आमद के साथ देश में चीतों की कुल संख्या 39 से बढ़कर 48 हो गई है।

नई खेप में 6 मादा और 3 नर चीते शामिल हैं। अब तक कूनो में नर चीतों की संख्या ज्यादा थी, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ बदली हुई नजर आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मादाओं की संख्या बढ़ने से प्रजनन दर में तेजी आ सकती है। यह संतुलन भविष्य में परियोजना को स्थिर आधार देने में अहम भूमिका निभा सकता है।

MP के कूनो में फिर गूंजा चीता प्रोजेक्ट

चीतों के आगमन के मौके पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव स्वयं कूनो पहुंचे। उन्होंने एक क्रेट का हैंडल घुमाकर दो चीतों को क्वारंटीन बाड़े में छोड़ा। बाकी चीतों को वन विभाग की प्रशिक्षित टीम ने सावधानीपूर्वक निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार शिफ्ट किया। पूरे अभियान की निगरानी विशेषज्ञों की टीम कर रही है। अब 12 महीने से अधिक उम्र के चीतों की संख्या और अनुपात पर नजर डालें तो गणित साफ तौर पर बदल चुका है। पहले कूनो में 26 वयस्क चीते थे, जिनमें 14 नर और 12 मादा थीं। नई खेप जुड़ने के बाद वयस्कों की संख्या 35 हो गई है, जिसमें 18 मादा और 17 नर शामिल है। पहली बार मादाओं का पलड़ा थोड़ा भारी हुआ है। वन्यजीव जानकार इसे सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।

शावकों की बढ़ेगी उम्मीद

विशेषज्ञों का कहना है कि मादा चीतों की संख्या बढ़ने से क्षेत्रीय संघर्ष कम हो सकता है। नर चीतों के बीच वर्चस्व की लड़ाई अक्सर देखी जाती है, जिससे जोखिम बढ़ता है। मादाओं की बढ़ती मौजूदगी शावकों के जन्म और उनकी सुरक्षा की संभावना को भी मजबूत करेगी। इससे परियोजना की दीर्घकालिक सफलता के रास्ते खुल सकते हैं।

बोत्सवाना से आए सभी 9 चीतों को करीब एक महीने तक क्वारंटीन में रखा जाएगा। इस दौरान उनकी सेहत, व्यवहार और नए माहौल में अनुकूलन की क्षमता पर लगातार नजर रखी जाएगी। इसके बाद चीता स्टीयरिंग समिति फैसला करेगी कि किन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाए। वन विभाग के अनुसार, हर चीते को जंगल में उतारने से पहले उसके मूवमेंट, शिकार प्रवृत्ति और इंसानी हस्तक्षेप से दूरी जैसे पहलुओं की गहन जांच की जाती है।

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