MP News : केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को लेकर उठ रही शंकाओं पर रविवार को साफ शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस डील का ढांचा ऐसा है, जिससे भारतीय किसानों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा। मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि समझौते में खेती से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को पूरी सावधानी से संभाला गया है।
शिवराज चौहान के मुताबिक, अमेरिका ने कई भारतीय कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाकर शून्य कर दिया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को सीधा फायदा मिला है। वहीं भारत ने अपने किसानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी कृषि उत्पादों को वैसी खुली छूट नहीं दी।
MP News: समझौते से भारतीय किसानों को नहीं होगा नुकसान
उन्होंने बताया कि अमेरिका में भारतीय सामानों पर औसतन टैरिफ 18 प्रतिशत तक सीमित किया गया है, जो पहले काफी ज्यादा था। कृषि मंत्री ने दो टूक कहा कि इस व्यापार समझौते में किसी भी प्रमुख फसल, फल, डेयरी उत्पाद या मसालों को अमेरिकी आयात के लिए नहीं खोला गया है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि जिन उत्पादों से किसानों की आय और बाजार प्रभावित हो सकता है, उन्हें पूरी तरह डील से बाहर रखा जाए।
इन उत्पादों पर नहीं मिलेगी छूट
उन्होंने विस्तार से बताया कि सोयाबीन, मक्का, धान, गेहूं, चीनी, अनाज, पोल्ट्री, दूध और उससे बने उत्पाद, केले, स्ट्रॉबेरी, चेरी, हरी मटर, दालें, तिलहन, इथेनॉल और तंबाकू जैसे उत्पादों पर किसी तरह की टैरिफ रियायत नहीं दी गई है। अमेरिका से मक्खन, घी, पनीर या अन्य प्रोसेस्ड डेयरी उत्पादों का आयात भी नहीं होगा। शिवराज चौहान ने कहा कि इस समझौते से भारतीय मसाले पूरी तरह सुरक्षित हैं, बल्कि उनका निर्यात तेजी से बढ़ा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने कई भारतीय कृषि उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक के टैरिफ को सीधे जीरो कर दिया है, जिससे खासकर छोटे निर्यातकों और महिला उद्यमियों को भी लाभ मिला है।
प्रधानमंत्री की रणनीति का जिक्र
भोपाल में मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता हमेशा देश और किसानों का हित रहा है। इसी सोच के तहत व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने बताया कि भारत अब तक नौ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर चुका है और कई पर बातचीत जारी है। शिवराज चौहान ने इन समझौतों को विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जोड़ा। उनका कहना था कि संतुलित व्यापार नीति के जरिए 2047 तक देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना सरकार की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है, जिसमें किसान सबसे अहम कड़ी हैं।





