MP News : मध्यप्रदेश में सरकार ने विकास को केवल सड़कों और इमारतों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि उसे आस्था और संस्कृति से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश को एक ऐसे मॉडल की ओर ले जाया जा रहा है, जहां धार्मिक विरासत संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक प्रगति का रास्ता भी खुले। इसी सोच के तहत प्रदेशभर में सांस्कृतिक और धार्मिक ‘लोक’ विकसित किए जा रहे हैं।
प्रदेश में कुल 900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 20 धार्मिक और सांस्कृतिक लोक विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। इनमें से 17 लोकों का निर्माण कार्य तेज गति से जारी है, जिन पर 580 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जा रही है।
MP में आस्था से अर्थव्यवस्था तक
सरकार का दावा है कि ये स्थल आने वाले समय में मध्यप्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करेंगे। सागर में 101 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा संत रविदास लोक सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जा रहा है। सीहोर के सलकनपुर में देवी लोक और ओरछा में रामराजा लोक लगभग पूर्णता की ओर हैं। वहीं मंदसौर में पशुपतिनाथ लोक परिसर का कार्य पूरा कर इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया है, जिससे स्थानीय पर्यटन को नई ऊर्जा मिली है।
भोपाल, महेश्वर और जानापाव के प्रकल्प
राजधानी भोपाल में महाराणा प्रताप लोक, जानापाव में परशुराम लोक और महेश्वर में देवी अहिल्या संग्रहालय जैसे प्रकल्प पहले ही आकार ले चुके हैं। इन स्थलों ने न केवल सांस्कृतिक मानचित्र को समृद्ध किया है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में कारोबार और रोजगार की गतिविधियों को भी गति दी है। सरकार ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए 315 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तीन नए लोक और दो लोकों के दूसरे चरण के निर्माण की भी योजना बनाई है। ओंकारेश्वर में ममलेश्वर लोक, बैतूल में ताप्ती लोक और मैहर में शारदा लोक प्रस्तावित हैं। इसके अलावा, महेश्वर में देवी अहिल्या लोक और अमरकंटक में नर्मदा लोक का दूसरा चरण भी विकसित किया जाएगा।
पर्यटन से रोजगार तक की कड़ी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि ये लोक केवल धार्मिक स्थल नहीं होंगे, बल्कि प्रदेश के लिए नए ग्रोथ इंजन साबित होंगे। ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना के तहत यहां हस्तशिल्प, होटल, गाइड सेवा और परिवहन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को सीधे लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि आस्था और आजीविका का यह मेल मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम देगा।
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