Milk Business Rule : देश में दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट की लगातार मिल रही शिकायतों के बीच अब बड़ा फैसला लिया गया है। खाद्य सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार संस्था Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने दूध के कारोबार को लेकर नए नियम लागू करने का निर्देश दिया है। अब बिना पंजीकरण या लाइसेंस के कोई भी व्यक्ति या संस्था दूध का उत्पादन या बिक्री नहीं कर सकेगी। इस कदम का मकसद बाजार में मिलावटी दूध पर रोक लगाना और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है।
एफएसएसएआई ने इस संबंध में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य आयुक्तों को स्पष्ट निर्देश भेजे हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में दूध उत्पादकों और विक्रेताओं की जांच करें।
Milk Business Rule
यह सुनिश्चित करें कि उनके पास वैध लाइसेंस या पंजीकरण मौजूद हो। यदि कोई बिना अनुमति के कारोबार करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। प्राधिकरण का कहना है कि नियमों का पालन सख्ती से कराना जरूरी है, तभी मिलावट पर नियंत्रण संभव होगा। नए नियमों में किसानों और पशुपालकों को भी कुछ राहत दी गई है। जो किसान किसी पंजीकृत डेयरी सहकारी समिति से जुड़े हुए हैं और उसी के माध्यम से दूध सप्लाई करते हैं, उन्हें अलग से लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे लोग पहले से ही संगठित व्यवस्था का हिस्सा माने जाते हैं, इसलिए उनके लिए अतिरिक्त औपचारिकता नहीं रखी गई है। इससे छोटे पशुपालकों को अनावश्यक कागजी प्रक्रिया से बचाया जा सकेगा।
उपकरणों की भी होगी जांच
सिर्फ लाइसेंस ही नहीं, बल्कि दूध के भंडारण और प्रसंस्करण की व्यवस्था पर भी नजर रखी जाएगी। एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दूध ठंडा करने वाले उपकरणों और स्टोरेज सिस्टम का समय-समय पर निरीक्षण करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दूध खराब न हो और उपभोक्ताओं तक सुरक्षित तरीके से पहुंचे। सही तापमान और स्वच्छता बनाए रखना भी अब निगरानी का हिस्सा होगा।
पंजीकरण अभियान चलाने का निर्देश
प्राधिकरण ने राज्यों से कहा है कि वे विशेष अभियान चलाकर दूध कारोबार से जुड़े लोगों को पंजीकरण कराने के लिए प्रेरित करें। इसके साथ ही ऐसे मामलों की पहचान भी की जाए जहां लोग बिना लाइसेंस के कारोबार कर रहे हैं। पिछले वर्ष भी इसी तरह के अभियान की शुरुआत की गई थी, लेकिन अब इसे और व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी की जा रही है।
उपभोक्ताओं की सेहत पर रहेगा फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि दूध रोजमर्रा के आहार का अहम हिस्सा है, इसलिए इसकी गुणवत्ता पर समझौता नहीं किया जा सकता। इसी कारण सरकार और खाद्य सुरक्षा एजेंसियां मिलावट पर कड़ा रुख अपना रही हैं। नए नियमों के लागू होने के बाद उम्मीद है कि बाजार में मिलावटी दूध की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा और लोगों को सुरक्षित डेयरी उत्पाद मिल सकेंगे।
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