MGNREGA Name Change News : केंद्र सरकार (Central Govt) मनरेगा योजना (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act) का नाम बदलने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है। सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस प्रस्ताव पर आज होने वाली केंद्रीय कैबिनेट बैठक में मुहर लग सकती है। चर्चा यह है कि मनरेगा को नया नाम पूज्य बापू ग्रामीण योजना मिल सकता है। अगर कैबिनेट की मंजूरी मिल गई, तो आने वाले दिनों में देश के करोड़ों ग्रामीण मजदूर इस योजना को इसी नए नाम से पहचानेंगे।
अगर प्रस्ताव पास हो गया, तो आने वाले हफ्तों में इसका औपचारिक एलान किया जाएगा। ग्रामीण भारत के सबसे बड़े रोजगार कार्यक्रम का नाम बदलना अपने आप में एक बड़ा कदम होगा, इससे देश के करोड़ों लोगों को फायदा होगा।
MGNREGA की शुरुआत
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, योजना को महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी एक नई पहचान देने की सोच पर काम चल रहा है। साल 2005 में जिस मनरेगा की शुरुआत हुई थी, वह ग्रामीण भारत में रोजगार सुरक्षा के लिए एक बड़ी पहल थी। बाद में इसका नाम बदलकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम किया गया। अब सरकार इसे फिर एक नई पहचान देने का मन बना चुकी है।
MGNREGA का उद्देश्य
मनरेगा का लक्ष्य ग्रामीण परिवारों को जरूरत पड़ने पर साल में कम-से-कम 100 दिन की मजदूरी वाला काम मिलना था, ताकि कोई परिवार बेरोजगारी और आर्थिक संकट में न फंस सके। बता दें कि यह एक तरह का अधिकार है, जिसमें काम मांगने पर सरकार रोजगार देने के लिए बाध्य है। सालों में इस योजना ने लाखों गांवों में तालाब, सड़कें, नाली, मिट्टी कार्य, हरियाली परियोजनाओं जैसी अनेक संरचनाएं खड़ी की। ग्रामीण विकास मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022-23 तक 15 करोड़ से ज्यादा लोग मनरेगा के माध्यम से काम कर रहे थे। यह दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजनाओं में गिनी जाती है।
मनरेगा योजना का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ किया जा सकता है।#RANGINDIA #MahatmaGandhi pic.twitter.com/GmtckWQG0i
— Rang India (@therangindia) December 12, 2025
गरीब परिवारों की रीढ़ बनी योजना
मनरेगा की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि हर राज्य में बड़ी संख्या में महिलाएं इससे जुड़ीं। गांव में ही काम मिलने से लोगों का शहरों की ओर पलायन कम हुआ। खेत-खलिहान से जुड़ी मिट्टी के कार्यों और जल संरक्षण वाली गतिविधियों ने पर्यावरण को भी फायदा पहुंचाया। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इस योजना ने ग्रामीण स्तर पर आर्थिक और सामाजिक दोनों मोर्चों पर मजबूती दी है।
बैठक पर टिकी निगाहें
हालांकि, नियमों में कोई बदलाव होने की संभावना नहीं है। अभी भी ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन का काम देना योजना की मुख्य शर्त है। बता दें कि केंद्र सरकार इसका बजट जारी करती है और काम की मॉनिटरिंग राज्य सरकारें करती हैं, लेकिन नया नाम आने के बाद पूरे देश में सरकारी दस्तावेजों, पोर्टल्स, कार्डों और रिकॉर्ड में मनरेगा की जगह पूज्य बापू ग्रामीण योजना लिखा हुआ दिखाई दे सकता है। फिलहाल, अब सबकी निगाहें कैबिनेट की बैठक पर टिकी हैं।
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