मनोझ झा ने सदन में गाया गाना,कह दी बड़ी बात…

Spread the love

किसानों को लेकर के पूरे देशभर में सियासत तेज हो गई। बता दें, पूरा भारत अब दो हिस्सों में बट चुका है, एक दल जो किसानों का लगातार ही सर्मथन कर रहे हैं और दूसरे वो ये बोल रहे हैं कि शांति से भी बैठ कर मामला सुलझाया जा सकता है। दरअसल, बॉलीबुड के कई हस्तियां तो इसपर अपनी राय दे ही रहे हैं, लेकिन बॉलीबुड के साथ ही साथ अब विदेश की भी कई हस्तियां किसान अंदोलन को लेकर के ट्वीट कर रहे हैं। दरअसल, पॉप गायिका रिहाना के एक ट्वीट से विवाद खड़ा हो गया। वो इसलिए क्योंकि बहुत लोगों का कहना है कि जब ये मामला भारत का है तो फिर इसमें बाहर के लोग क्यों दखल दे रहे हैं।

आपको बताते चलें, 3 कृषि कानूनों के विरोध में किसान लगातार अंदोलन कर रहे हैं, धीरे-धीरे उनका ये अंदोलन और भी ज्यादा उग्र होता जा रहा है। दिल्ली की सीमाओं पर पुलिस की तैनाती और भी बढ़ा दी गई है। लेकिन विपक्ष इसमें भी राजनिती करने से बाज नहीं आ रहें। देशभर में हो रहे किसान अंदोलन को विपक्ष का पूरा सर्मथन मिल रहा है। संसद में विपक्षी दलों के सदस्य खुलकर सरकार को घेर रहे हैं। इसके तहत आरजेडी सांसद मनोज झा ने किसानों के समर्थन में सदन में गाना गाया। राज्‍यसभा सदस्‍य मनोज झा ने सदन में गाया– क्यों डराते हो जिंदा की दीवार से… सदन में उन्होंने कहा कि किसानों का दर्द समझिये, सर्दी में बैठे हैं, उनका पानी बंद कर दिया आपने। साथ ही उन्होनें अप्रत्यक्ष रुप से चीन विवाद की ओर इशारा करते हुए कहा कि इतनी लाल आंखें दिखा रहे हैं, इतनी तो हमने उस पड़ोसी को भी नहीं दिखाईं, जहां दिखानी चाहिये थी।

26 जनवरी को राजधानी दिल्ली में हुई घटना के बाद से देश में इसको लेकर चर्चें और भी ज्यादा बढ़ गई हैं। किसान संगठन भी अलग-अलग धड़ों में बंट गए हैं, लेकिन किसान का एक बड़ा समूह अभी भी दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहा है। आंदोलनकारी किसानों के दिल्ली में प्रवेश रोकने के लिए सीमाओं को सील किया जा रहा है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इसके बाद भी किसान अपनी मांग पर अड़े हैं और मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। आपको बता दें, 2 महीने से अधिक समय बीत चुके हैं लेकिन किसान दिल्ली की सीमाओं पर लगातार विरोध कर रहे हैं। हालाकिं, इस बीच कई बार केंद्र सरकार और किसानों के बीच बात भी हुई, और केंद्र सरकार ने 3 कानूनों को डेढ़ साल तक संपेस्ड करने की भी बात की लेकिन किसान इस नए कानून को पूरी तरह वापस लेने की बात कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published.