LJP के दलित वोट बैंक पर महागठबंधन की नजर, चिराग यदि साथ आए तो अगले चुनाव में बदल जाएगा समीकरण

बिहार में अगले चुनाव के लिए अभी से नया समीकरण बनाने की तैयारी चल रही है। ये समीकरण लालू यादव के MY समीकरण जैसा ही होगा। लेकिन, इसमें एक कदम आगे के गणित पर काम किया जाएगा। जिस गणित को देखते हुए LJP को तोड़ कर एनडीए के जदयू और बीजेपी उत्साहित हैं, वही गणित बदला तो पूरा समीकरण ही बदल जाएगा। एलजेपी भले विधानसभा में हार गई हो, लेकिन उसके वोटर उसी के पास हैं। चिराग के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही एलजेपी को उतने ही वोट मिले, जितने पहले मिलते रहे हैं। इस बार के बिहार चुनाव में एलजेपी को 6 फीसदी वोट मिले। चिराग पासवान ने अपने लिए इसे उपलब्धि मानी और कहा बिहार के 25 लाख लोगों ने उन्हें पसंद किया है। एलजेपी में टूट के बाद अब इस वोट बैंक पर सबकी निगाह है। रामविलास पासवान के असली वारिस चिराग पासवान ही हैं। ऐसे में चिराग जिधर जाएंगे, उस तरफ ही ये वोट बैंक चला जाएगा। ऐसे नीतीश कुमार की भी उस दलित वोट पर नजर है। इसीलिए एलजेपी में तख्तापलट का खेल किया गया है।

राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि एलजेपी तोड़ने के ऑपरेशन में जदयू का बड़ा हाथ था। दबी जुबान में ये कहा जा रहा है कि एक बड़े डील की वजह से एलजेपी के सभी 5 सांसदों ने चिराग पासवान से बगावत की। चर्चा यह भी है कि बागी सांसद नीतीश कुमार को अपना समर्थन भी दे दें। लेकिन, अलग-अलग जाति से आने वाले ये सांसद एलजेपी का वोट बैंक मूव कराने में सफल नहीं पाएंगे। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चिराग पासवान के पास एक ही ऑप्शन है कि वो विपक्ष की राजनीति करें। क्योंकि उनके चाचा को LJP संसदीय दल का नेता बना दिया गया। बिहार में विपक्ष के तौर पर खड़ी राजद के साथ भी वही कहानी है। भले सत्ता में राजद नहीं है, लेकिन यादवों का 16 प्रतिशत वोट मिल जाता है। वहीं, मुसलमान राजद और कांग्रेस को छोड़ कर दूसरे को बहुत कम वोट देते हैं। बिहार में मुसलमान 17 प्रतिशत हैं। यदि, चिराग पासवान का 6 प्रतिशत वोट इस में मिल जाता है तो अगले चुनाव में महागठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में होगी। सभी पार्टियों का वोट प्रतिशत मिला लिया जाए तो 39 फीसदी वोट हो जाते हैं। वहीं लेफ्ट और कांग्रेस के अलग कैडर हैं, जो हर हाल में कांग्रेस और लेफ्ट को ही वोट देते हैं। ऐसे में चिराग ने यदि पलटी मारी तो एनडीए का पूरा समीकरण ध्वस्त हो जाएगा।

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