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Magh Mela 2026 में कल्पवास का महत्व, इसके नियमों का पालन करने से पापों का होता है नाश!

Magh Mela
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Magh Mela 2026 : प्रयागराज की पावन धरती पर माघ मेला हर साल श्रद्धा और भक्ति की भावना से मनाया जाता है। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु संगम तट पर छोटे-छोटे तंबुओं में रहकर एक महीने तक कठिन नियमों का पालन करते हैं, जिसे ‘कल्पवास’ कहा जाता है। कल्पवास शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है ‘कल्प’, जिसका अर्थ है समय का एक चक्र और वास यानी निवास। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में संगम तट पर रहकर साधना करने से व्यक्ति का मानसिक और आध्यात्मिक कायाकल्प होता है। पद्म पुराण और मत्स्य पुराण में कल्पवास का विशेष महत्व बताया गया है। माघ महीने में ऐसा माना जाता है कि सभी देवी-देवता संगम तट पर निवास करते हैं। ऐसे समय में यहां रहकर पूजा-अर्चना करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है।

कल्पवास मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि की प्रक्रिया है। गंगा स्नान, सात्विक भोजन और सत्संग में समय बिताने से साधक अपने कर्मों से शुद्ध होता है और मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ता है।

Magh Mela 2026: धार्मिक महत्व

कल्पवास करने वाले साधक अपने जीवन में कई कठिन नियम अपनाते हैं। वे दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन या फलाहार करते हैं। इसके साथ ही दिन में तीन बार गंगा स्नान और पूजा-पाठ करना अनिवार्य होता है। पलंग और बिस्तर का त्याग कर जमीन पर पुआल या साधारण चटाई पर सोना होता है। इस दौरान झूठ बोलने, क्रोध करने, निंदा करने और सांसारिक सुख-सुविधाओं का त्याग करना जरूरी होता है। कल्पवासी अपने तंबू में अखंड दीप जलाते हैं और दिनभर प्रवचन, कीर्तन और सत्संग में समय बिताते हैं। इस कठोर साधना के दौरान व्यक्ति केवल अपने आध्यात्मिक विकास पर ध्यान केंद्रित करता है। गंगा स्नान के साथ साधना करने से शरीर और मन दोनों पवित्र होते हैं।

कल्पवास के नियम

माघ मेला का आयोजन पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक चलता है और इस दौरान हजारों श्रद्धालु संगम तट पर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। कल्पवास न केवल व्यक्तिगत मोक्ष के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समुदाय में आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति की भावना को भी बढ़ावा देता है। बता दें कि प्रयागराज में हर साल हजारों भक्त आते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से व्यक्ति का मन, शरीर और आत्मा शुद्ध होती है और पिछले जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है। इस दौरान माना जाता है कि संगम तट पर सभी देवी-देवता निवास करते हैं, जिससे साधक को मोक्ष और अक्षय फल की प्राप्ति होती है।

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