LPG Crisis : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच गैस वितरण कंपनियों ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के व्यावसायिक उपयोग पर आंशिक रोक लगाई गई है। उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए गैस कोटे में करीब 20 प्रतिशत तक की कटौती की गई है, ताकि भविष्य में अगर संकट गहराता है तो घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतें प्रभावित न हों।
यह निर्णय लखनऊ और आगरा सहित पांच शहरों में लागू किया जा रहा है। इन शहरों में PNG की आपूर्ति करने वाली कंपनी ग्रीन गैस लिमिटेड ने इस अस्थायी व्यवस्था को लागू करने की घोषणा की है।
LPG Crisis
लखनऊ के साथ-साथ आगरा, सुलतानपुर, अयोध्या और उन्नाव में भी उद्योगों को मिलने वाली गैस की मात्रा कम कर दी जाएगी। कंपनी का कहना है कि मौजूदा समय में गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और किसी तरह की तत्काल कमी नहीं है। इसके बावजूद एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार अगर युद्ध लंबा खिंचता है या आपूर्ति में अचानक बाधा आती है, तो पहले घरेलू उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराना जरूरी होगा। इसी वजह से उद्योगों के हिस्से में सीमित कटौती की गई है।
विदेशी गैस पर ज्यादा निर्भरता
भारत में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) और PNG की कुल खपत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है। अनुमान के मुताबिक लगभग 70 प्रतिशत गैस आयात पर निर्भर है। खाड़ी देशों से आने वाली गैस इसमें अहम भूमिका निभाती है, खासकर कुवैत से। लेकिन इन दिनों अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण आपूर्ति मार्गों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
लखनऊ में PNG का नेटवर्क तेजी से फैल चुका है और यहां हजारों उपभोक्ता इससे जुड़े हुए हैं। शहर में करीब 80 हजार घरेलू कनेक्शन बताए जाते हैं, जबकि कई उद्योग और संस्थान भी इसी गैस से अपने संयंत्र चला रहे हैं। अमूल और अशोक लीलैंड जैसी बड़ी कंपनियां भी उत्पादन के लिए PNG का उपयोग करती हैं। आगरा में भी कई फैक्ट्रियां और औद्योगिक इकाइयां इसी गैस पर निर्भर हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता की वजह
ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता की असली वजह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष है। जिस होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस टैंकर गुजरते हैं, वहीं इस समय तनाव और सुरक्षा खतरे के कारण आवाजाही प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि ऊर्जा कंपनियां अभी से संसाधनों के प्रबंधन पर जोर दे रही हैं। लखनऊ में PNG पाइपलाइन नेटवर्क लगभग पूरे शहर में पहुंच चुका है। पुराने शहर के कुछ हिस्सों को छोड़कर अधिकांश इलाकों में घरों और संस्थानों तक पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। इसी कारण बड़ी संख्या में लोग अब रसोई गैस के विकल्प के तौर पर PNG का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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