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Loksabha में हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित, राहुल गांधी को बोलने देने की मांग पर अड़ा विपक्ष

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Loksabha : संसद के बजट सत्र में लगातार दूसरे दिन लोकसभा का माहौल शांत होने से पहले ही बिगड़ गया। जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने अपनी सीटों से खड़े होकर नारेबाजी शुरू कर दी। शोर-शराबे के बीच सदन को चलाना मुश्किल हो गया, जिसके बाद लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। हंगामे की वजह से प्रश्नकाल समेत जरूरी कामकाज ठप हो गया।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने हंगामे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सदन नियमों से चलता है और हर सदस्य को नियमों के तहत बोलने का अधिकार है। उन्होंने साफ कहा कि संसद नारेबाजी और व्यवधान के लिए नहीं है, बल्कि चर्चा और सहमति-असहमति के लिए है। स्पीकर की इस टिप्पणी के बावजूद विपक्ष का आक्रोश कम नहीं हुआ।

Loksabha में हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित

कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसदों ने एक सुर में ‘राहुल गांधी को बोलने दो’ के नारे लगाए। विपक्ष का आरोप है कि उन्हें सदन में अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया जा रहा। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि अगर राहुल गांधी को बोलने दिया गया, तो सदन सुचारू रूप से चल सकता है, अन्यथा गतिरोध जारी रहेगा। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी नेताओं ने सदन परिसर में एक अहम बैठक की। इस बैठक में लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की संभावना पर भी चर्चा हुई। बैठक के बाद विपक्ष ने साफ संकेत दिए कि वह अपने रुख से पीछे हटने के मूड में नहीं है और सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति जारी रहेगी।

कांग्रेस का साफ संदेश

कांग्रेस पार्टी ने दो टूक शब्दों में कहा कि राहुल गांधी को सदन में बोलने दिया गया तो कार्यवाही सुचारू रहेगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। कांग्रेस का यह भी दावा है कि सरकार जानबूझकर मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। संसद पहुंचने पर जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से पूछा गया कि क्या आज भी सदन नहीं चलेगा, तो उन्होंने पलटकर सवाल किया कि कौन कहता है कि सदन नहीं चलेगा? उनके इस बयान से साफ संकेत मिला कि विपक्ष अभी टकराव के मूड में है, लेकिन गेंद अब सरकार और स्पीकर के पाले में है।

आगे क्या?

बजट सत्र के अहम पड़ाव पर बार-बार हो रहा हंगामा सरकार और विपक्ष दोनों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। अब देखना होगा कि आने वाले घंटों में कोई बीच का रास्ता निकलता है या संसद का यह गतिरोध और गहराता है।

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