Lok Sabha Conduct Row : लोकसभा में हाल के दिनों में बढ़ती अव्यवस्था को लेकर लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को पत्र लिखकर सदन के भीतर और संसद परिसर में सांसदों के व्यवहार पर गंभीरता से ध्यान देने का आग्रह किया है। स्पीकर का कहना है कि संसद देश के लोकतांत्रिक ढांचे की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है, इसलिए यहां की मर्यादा और गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।
स्पीकर ने अपने पत्र में कहा कि हाल के समय में कुछ सांसदों द्वारा सदन में बैनर, पोस्टर और तख्तियां दिखाने की प्रवृत्ति बढ़ी है। इसके साथ ही कई बार ऐसी भाषा का इस्तेमाल भी किया जा रहा है जो संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं मानी जाती।
Lok Sabha Conduct Row
उनका मानना है कि इस तरह का व्यवहार न केवल संसद की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है बल्कि लोकतांत्रिक संवाद की गंभीरता को भी कमजोर करता है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि भारतीय संसद में हमेशा से विचार-विमर्श और बहस की समृद्ध परंपरा रही है। मतभेदों के बावजूद सांसद मुद्दों पर तर्कपूर्ण चर्चा करते रहे हैं। लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने इस परंपरा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्पीकर का कहना है कि सभी दलों को मिलकर इस स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
अनुशासन बनाए रखने की अपील
लोकसभा अध्यक्ष ने सभी दलों के नेताओं से आग्रह किया कि वे अपने-अपने सांसदों को संसदीय आचरण के नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें व्यक्त करने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अगर सांसद संयम और मर्यादा के साथ अपनी बात रखें तो संसद की गरिमा बनी रहती है। यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में स्पीकर के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव सदन में ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया था।
विपक्षी दलों ने इस दौरान स्पीकर पर पक्षपात के आरोप भी लगाए थे। इन परिस्थितियों के बीच स्पीकर की ओर से सभी दलों को लिखे गए पत्र को संसदीय व्यवस्था को मजबूत करने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा पर जोर
स्पीकर ने अपने संदेश में यह भी कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। संसद के भीतर अगर अनुशासन और गरिमा कायम रहेगी तो लोकतंत्र में लोगों का विश्वास और मजबूत होगा। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया कि वे इस दिशा में गंभीर प्रयास करें। पत्र के अंत में स्पीकर ने स्पष्ट किया कि यह पहल केवल औपचारिकता के तौर पर नहीं की गई है। उनका कहना है कि संसद की प्रतिष्ठा बनाए रखना सभी दलों और सांसदों की साझा जिम्मेदारी है। यदि सभी राजनीतिक दल मिलकर इस दिशा में कदम उठाते हैं तो संसदीय लोकतंत्र की गरिमा को और मजबूत किया जा सकता है।





