LOC Rule Change : केंद्र सरकार ने लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी करने की प्रक्रिया में अहम बदलाव कर दिए हैं। गृह मंत्रालय ने नए निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अब कुछ वैधानिक संस्थाएं सीधे किसी व्यक्ति को देश से बाहर जाने से रोकने के लिए LOC जारी करने का अनुरोध नहीं कर सकेंगी। यह फैसला LOC के संभावित दुरुपयोग को रोकने और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। मंत्रालय के निर्देश सभी संबंधित एजेंसियों को भेज दिए गए हैं।
नए नियमों के मुताबिक राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राष्ट्रीय कंपनी कानून अधिकरण जैसे निकाय अब सीधे ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन से LOC की मांग नहीं कर पाएंगे।
LOC नियमों में बड़ा बदलाव
गृह मंत्रालय का कहना है कि जिन संस्थाओं के पास आपराधिक अधिकार क्षेत्र नहीं है, वे इस प्रक्रिया में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। ऐसे मामलों में उन्हें अब कानून प्रवर्तन एजेंसियों के माध्यम से ही अनुरोध भेजना होगा। सरकार ने ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन को भी साफ निर्देश दिए हैं कि यदि किसी ऐसे निकाय से LOC का अनुरोध आता है जिसके पास आपराधिक अधिकार क्षेत्र नहीं है, तो उसे तुरंत वापस कर दिया जाए। साथ ही संबंधित संस्था को यह जानकारी दी जाए कि वह इस तरह का अनुरोध करने के लिए अधिकृत नहीं है और उसे पुलिस या अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसी के माध्यम से ही प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
पहले क्या थी व्यवस्था
पुराने नियमों में इन संस्थाओं के लिए सीधे अनुरोध करने पर स्पष्ट रोक नहीं थी। हालांकि यह जरूर कहा गया था कि ऐसे मामलों की जानकारी पुलिस या अन्य जांच एजेंसियों को भी दी जानी चाहिए। इसके बाद पुलिस अधिकारी मामले की समीक्षा करते थे और जरूरत पड़ने पर LOC जारी करने का अनुरोध किया जाता था। अब सरकार ने इस प्रक्रिया को और सख्त बनाते हुए स्पष्ट जिम्मेदारी तय कर दी है।
LOC फॉर्म में भी किया गया बदलाव
गृह मंत्रालय ने LOC से जुड़े फॉर्मेट में भी बदलाव किए हैं। अब इसमें तीन तय विकल्प दिए गए हैं व्यक्ति को रोककर सूचना देना, देश छोड़ने से रोककर सूचना देना और विशेष टिप्पणी के आधार पर कार्रवाई करना। खुफिया एजेंसियों को ‘विशेष टिप्पणी’ वाले विकल्प का इस्तेमाल केवल आतंकवाद से जुड़े मामलों में ही करने की अनुमति दी गई है।
नई समयसीमा
नई व्यवस्था में अदालत के आदेशों को लेकर भी स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है। यदि अदालत LOC को रद्द या निलंबित करने का आदेश देती है तो संबंधित एजेंसी को उसे तुरंत ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन तक पहुंचाना होगा। इसके अलावा अगर किसी LOC वाले व्यक्ति को सीमा जांच चौकी पर पकड़ा जाता है तो संबंधित एजेंसी को तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी। तय समय में कार्रवाई नहीं होने पर व्यक्ति को स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा और 24 घंटे के भीतर हिरासत लेने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी की होगी।
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