बागी तेवर छोड़ गीता की शरण में पहुंचे लालू के लाल, अब फल नहीं कर्म पर फोकस करेंगे तेजप्रताप

राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad yadav) के बड़े बेटे और राजद के विधायक तेजप्रताप यादव (Tej Pratap yadav) अपने बयानों से पार्टी में बवंडर मचाने के बाद अब धीरे-धीरे गीता के उपदेश का पालन करने लगे हैं। दिल्ली में पिता लालू प्रसाद यादव से मुलाकात के बाद पटना लौटे तेजप्रताप के तेवर अब ठंडा पड़ने लगा है। हालांकि पटना लौटने के बाद प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ( Jagdanand Singh) को इग्नौर कर पार्टी दफ्तर में मीटिंग की बात हो या फिर जन्माष्टमी के दौरान लगाए गए पोस्टर, इन दोनों घटनाक्रम से वो अपना स्टैंड तो क्लीयर करना चाहते थे लेकिन अंदरखाने ये चर्चा है कि लालू यादव के निर्देश के बाद तेजप्रताप अब बैकफूट पर नजर आ रहे हैं।

हसनपुर से विधायक तेजप्रताप यादव पार्टी में सियासी भूचाल मचाने के बाद अब सब कुछ मैनेज करने में जुटे हैं। पांडवों की तर्ज पर अपने भाई और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से पांच गांव की मांग करने वाले तेजप्रताप अब गीता के उपदेश के सहारे अपने राजनीतिक कैरियर को आगे बढ़ाने में लगे हैं। शुक्रवार को तेजप्रताप यादव ने गीता के उपदेश को ट्वीट किया है। ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि वही व्यक्ति सफल होता है जो फल की इच्छा किए बिना ही कर्म करता रहता है। तेजप्रताप के इस ट्वीट के सियासी गलियारे में कई मायने निकाले जा रहे हैं।

तेजप्रताप यादव दिल्ली से पटना लौटने के बाद पॉलिटिकली एक्टिव दिख रहे हैं। वो लगातार लोगों के बीच रहकर अपना और पार्टी का जनाधार बढ़ाने की जुगत में लगे हुए हैं। हाल ही में वो पटना के अदालतगंज, कमला नेहरू नगर की बस्ती में पहुंचे और वहां के लोगों की परेशानियों को देखा। यही नहीं उन्होंने फेसबुक पर सेकेंड लालू तेजप्रताप यादव के नाम से नया पेज भी बनाया है जिसपर वो लगातार सियासी सक्रियता को लेकर जानकारी देते रहते हैं। अब देखना यह है कि तेजप्रताप का ये बदला अंदाज पार्टी के हित में कितना कारगर साबित होता है।

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