कन्हैया कुमार वामपंथी चोला उतार कांग्रेसी बनेंगे! राहुल गांधी से हुई मुलाकात, प्रशांत किशोर भी थे साथ में

अपनी पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया यानि CPI में किनारे लगा दिये गये जेएनयू वाले कन्हैया कुमार अब कांग्रेसी पंजा थामने की तैयारी में हैं. कांग्रेस के सूत्र तो ऐसी ही खबर दे रहे हैं. कांग्रेस के नेता बता रहे हैं कि कन्हैया कुमार ने दो दफे राहुल गांधी से मुलाकात की है. दोनों मुलाकात में प्रशांत किशोर भी मौजूद थे. माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर ही उन्हें कांग्रेस में लाने में अहम रोल निभा रहे हैं. अटकलें यह भी लगाई जा रही हैं कि कन्हैया 2024 में बिहार की तरफ से कांग्रेस के बड़े चेहरे बन सकते हैं।

कन्हैया के कांग्रेस में जाने की चर्चा तब हुई, जब उन्होंने CPI मुख्यालय में अपना दफ्तर खाली कर दिया। CPI के अंदर कन्हैया को लेकर लोकसभा चुनाव के बाद से ही सवाल उठने लगे थे। यहां तक कि अनुशासनहीनता को लेकर CPI की हैदराबाद में हुई बैठक में उनके खिलाफ निंदा प्रस्‍ताव पारित किया गया था। बताया जा रहा है कि कन्हैया को कांग्रेस में लाने की जिम्मेदारी जौनपुर सदर के पूर्व विधायक मो. नदीम जावेद को सौंपी गई है। नदीम जावेद NSUI के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय युवा कांग्रेस के पूर्व महासचिव, कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और मीडिया पैनलिस्ट हैं। कन्हैया और नदीम की कई दौर की बात हो चुकी है।

कांग्रेस को पिछले 5 विधानसभा चुनावों में कोई खास सफलता नहीं मिली है। फरवरी 2005 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 10 सीट मिली थी, जो अक्टूबर 2005 में घटकर 9 रह गई। 2010 के विधानसभा चुनाव में तो कांग्रेस को महज 4 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। 2015 विधानसभा चुनाव में जब RJD और JDU के साथ कांग्रेस महागठबंधन का हिस्सा बनी तो पार्टी को 27 सीटों पर जीत मिली थी। 2020 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में रहने के बाद भी कांग्रेस महज 19 सीटें जीत सकी। वहीं, लोकसभा चुनाव 2019 में तो कांग्रेस को बिहार में एक सीट मिली थी। अपने पुराने परिणाम को देखते हुए कांग्रेस अब बिहार में नए नेतृत्वकर्ता के रूप में कन्हैया को लाना चाहती है।

कन्हैया 2015 में JNU छात्रसंघ के अध्यक्ष बने थे। JNU में लगे देश विरोधी नारों के बाद कन्हैया का नाम सभी की जुबान पर आ गया। कन्हैया कुमार बिहार की सियासत से बहुत जुड़े हुए नहीं रहे हैं. उन्होंने 2019 का चुनाव बिहार में सीपीआई का गढ माने जाने वाले बेगूसराय से लड़ा था लेकिन बीजेपी के गिरिराज सिंह से वे बुरी तरह चुनाव हारे. कन्हैया कुमार तकरीबन सवा चार लाख वोट से चुनाव हारे. उसके बाद जब केंद्र की बीजेपी सरकार ने सीएए लाया तो कन्हैया ने बिहार में यात्रा भी निकाली लेकिन वो भी फ्लॉप ही मानी गयी. इस यात्रा के कर्ताधर्ता भी कांग्रेस के विधायक शकील अहमद खान थे.

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