JP Power Chairman : दिवालिया प्रक्रिया से गुजर चुकी समूह कंपनी की सहायक इकाई Jaiprakash Power Ventures Limited के चेयरमैन मनोज गौड़ ने अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। 19 फरवरी 2026 की शाम उन्होंने कोर्ट में सरेंडर किया। इस घटनाक्रम का असर शेयर बाजार पर भी दिखा। 20 फरवरी को कंपनी के शेयर हल्की गिरावट के साथ करीब 14.77 रुपये पर कारोबार करते नजर आए। निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
कंपनी की ओर से स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया गया कि मनोज गौड़, जो नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चेयरमैन हैं, अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद अदालत में पेश हुए।
JP Power Chairman
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से उन्हें 14 दिन की अंतरिम राहत मिली थी। इससे पहले 16 फरवरी को नियमित जमानत याचिका खारिज हो चुकी थी। मनोज गौड़ को 13 नवंबर 2025 को Enforcement Directorate ने गिरफ्तार किया था। मामला वर्ष 2018 के कथित 13,000 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि हजारों घर खरीदारों से जुटाई गई राशि का उपयोग निर्धारित परियोजनाओं में नहीं किया गया। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 19 के तहत की गई थी।
हाईकोर्ट में जमानत की गुहार
अब मनोज गौड़ ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की पीठ में प्रस्तावित है। उनके वकील फारुख खान ने अदालत में दलील दी है कि उन्हें पहले अपनी मां की अस्वस्थता के आधार पर अंतरिम राहत मिली थी। फिलहाल, हाईकोर्ट के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं। Jaiprakash Associates Limited समूह से जुड़ी जेपी पावर बिजली उत्पादन और आपूर्ति के क्षेत्र में सक्रिय है। समूह की अन्य इकाइयों, जैसे Jaypee Infratech Limited, से इसके कारोबारी संबंध रहे हैं। मौजूदा कानूनी घटनाक्रम ने कंपनी की साख और निवेशकों के भरोसे पर असर डाला है। आने वाले दिनों में अदालत का रुख और जांच एजेंसियों की कार्रवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।
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