Japan Mars Mission : अंतरिक्ष की दुनिया में जापान ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मंगल ग्रह के रहस्यों को समझने के लिए जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA ने एक महत्वाकांक्षी अभियान शुरू किया है। इस मिशन के तहत मंगल के छोटे चंद्रमा फोबोस की सतह से मिट्टी और चट्टानों के नमूने जुटाने की योजना है। अगर अभियान सफल रहता है, तो वैज्ञानिकों को मंगल और उसके चंद्रमाओं की उत्पत्ति से जुड़े कई पुराने सवालों के जवाब मिल सकते हैं।
जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) के इस अभियान का नाम मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन (MMX) है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अंतरिक्ष यान को जापान के H3 रॉकेट की मदद से तनेगाशिमा स्पेस सेंटर से रवाना किया गया।
Japan Mars Mission
करीब पांच साल तक चलने वाले इस अभियान में कई अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष संस्थाएं सहयोग कर रही हैं। मिशन का नेतृत्व जापान कर रहा है। मंगल ग्रह के दो प्राकृतिक चंद्रमा हैं, जिन्हें फोबोस और डीमोस कहा जाता है। इनमें फोबोस मंगल के अधिक नजदीक है। इसका आकार काफी छोटा है और सतह पर अनेक गड्ढे मौजूद हैं। फोबोस लगभग 22.5 किलोमीटर चौड़ा है और मंगल की सतह से करीब 6,000 किलोमीटर ऊपर परिक्रमा करता है। इसकी खासियत यह है कि यह एक पृथ्वी दिवस में लगभग तीन बार मंगल का चक्कर पूरा कर लेता है। वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि मंगल के ये चंद्रमा कैसे बने। फोबोस से मिलने वाले नमूने इस रहस्य को सुलझाने में मदद कर सकते हैं।
फोबोस से 10 ग्राम नमूने लाने की तैयारी
MMX मिशन के तहत अंतरिक्ष यान के मंगल की कक्षा में पहुंचने के बाद फोबोस का अध्ययन किया जाएगा। योजना के अनुसार, मुख्य यान की लैंडिंग से पहले एक छोटा रोवर सतह पर उतारा जाएगा।यह रोवर फ्रांस और जर्मनी के सहयोग से विकसित किया गया है। इसका काम फोबोस की सतह की बनावट, मिट्टी और संभावित लैंडिंग क्षेत्रों की जांच करना होगा। इसके बाद मुख्य यान फोबोस पर उतरकर नमूने एकत्र करेगा। मिशन के तहत करीब 10 ग्राम मिट्टी और चट्टानी सामग्री पृथ्वी पर लाने का लक्ष्य रखा गया है।
रोवर करेगा सतह की जांच
फोबोस का गुरुत्वाकर्षण बेहद कमजोर है। ऐसे में वहां उतरना और सतह पर उपकरणों को नियंत्रित करना आसान नहीं होगा। मिशन की योजना के मुताबिक, चार पहियों वाला छोटा रोवर उतरने के बाद सतह पर अपनी स्थिति स्थिर करेगा। इसके बाद वह करीब 100 दिनों तक वैज्ञानिक अध्ययन कर सकेगा। मुख्य यान को सीमित समय के लिए सतह पर उतारने की योजना है। इस दौरान नमूने एकत्र करने के लिए विशेष उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा।
2031 में पृथ्वी पर लौटने का लक्ष्य
मिशन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, अंतरिक्ष यान को नवंबर 2030 में मंगल की कक्षा छोड़ने और वर्ष 2031 में पृथ्वी पर नमूने पहुंचाने का लक्ष्य दिया गया है। इस अभियान के दौरान मंगल के दूसरे चंद्रमा डीमोस का भी अध्ययन करने की योजना है। इससे वैज्ञानिकों को दोनों चंद्रमाओं की संरचना और इतिहास की तुलना करने का अवसर मिलेगा।
अमेरिका और चीन पहले मंगल की सतह पर अपने अंतरिक्ष यान उतार चुके हैं, लेकिन मंगल के चंद्रमा से नमूने पृथ्वी पर वापस लाना अलग और चुनौतीपूर्ण उपलब्धि होगी।
वैज्ञानिकों के लिए क्यों खास है यह अभियान?
फोबोस से प्राप्त सामग्री की प्रयोगशालाओं में जांच करके वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि यह चंद्रमा मंगल के आसपास ही बना था या किसी दूसरी जगह से आया था। इसके अलावा नमूनों से मंगल के शुरुआती इतिहास और सौरमंडल के विकास के बारे में नई जानकारी मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मिशन की सफलता अंतरिक्ष यान की लंबी यात्रा, सुरक्षित लैंडिंग और नमूनों की पृथ्वी पर वापसी पर निर्भर करेगी।




