नए कृषि कानूनों के खिलाफ ‘जाप’ ने मनाया काला दिवस

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कृषि कानूनों के विरोध में देशभर के किसान पिछले 6 महीने से दिल्ली की सिंघु बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी के समर्थन में कई किसान संगठनों ने आज ‘काला दिवस’ मनाने की घोषणा की थी। इस बीच जन अधिकार पार्टी ने पूरे बिहार में कृषि कानूनों के विरोध में काला दिवस मनाया।
कृषि कानून के खिलाफ आयोजित काला दिवस कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए जाप के युवा प्रदेश अध्यक्ष राजू दानवीर ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है देश के अन्नदाताओं के साथ वर्तमान सरकार जो दु‌र्व्यवहार कर रही है यह कहीं से उचित नहीं है । किसानों की मांगे पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसान विरोधी सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा। केंद्र सरकार ने इस काले कानून को लाकर किसानों को मारने का काम किया है। बता दें कि जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और संगठन प्रभारी दिनेश जी के नेतृत्व में इस काले कानून के खिलाफ काला दिवस मनाया गया इस अवसर पर दिनेश जी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों कानूनों से पहले मंडियों पर पूंजीपतियों का कब्ज़ा होगा फिर धीरे-धीरे किसानों से उनकी जमीन भी छीन ली जाएगी हमारी पार्टी संयुक्त किसान संघर्ष समिति के हरेक फैसले के साथ है।पार्टी कार्यालय में आयोजित इस धरना प्रदर्शन कार्यकम में राज्य प्रवक्ता बरुण जी, श्यामदेव सिंह चौहान, शशांक मोनू, निशांत कुमार, पुरुषोत्तम कुमार, नीरज कमांडो, नीतीश सिंह, सन्नी यादव, चन्दन कुमार, विनय यादव, आशीष, अमर राज, विकास सहित कई कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।गौरतलब है कि सिंघु बार्डर पर कृषि कानून के खिलाफ किसान काले झंडा दिखाकर काला दिवस मना रहे हैं. किसानों का कहना है कि कोरोना का डर दिखाकर सरकार उनको हटाना चाहती है भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा, “हमारा विरोध सरकार से है. सरकार तो तिरंगे को भी कहती है क्यों ले लिए. 6 महीने हो गए हैं सरकार नहीं सुन रही है तो काले झंडे तो लगाएंगे ही.

क्यों मना रहे हैं काला दिवस- 26 मई को काला दिवस मनाने पर किसान संगठनों का कहना है कि 26 नवंबर 2020 को किसान आंदोलन शुरू हुआ. आज ही के दिन इसके 6 महीने पूरे हो रहे हैं, इस कारण वे इसे काला दिवस के रूप में मना कर विरोध प्रदर्शन करेंगे. संयुक्त किसान मोर्चा ने अपने घरों, वाहनों और अन्य स्थानों पर काला झंडा लहराकर ‘काला दिवस’ मनाने की अपील की.

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