Jamui Train Accident Update : बिहार के जमुई जिले में मालगाड़ी दुर्घटना के बाद रेल यातायात की व्यवस्था पूरी तरह लड़खड़ा गई है। लगातार तीन दिनों से ट्रेनों के डायवर्जन ने हजारों यात्रियों को मुश्किल में डाल दिया है। कड़ाके की ठंड के बीच यात्री प्लेटफॉर्म, पूछताछ काउंटर और स्टेशन परिसर में भटकते नजर आ रहे हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि लोगों को यह तक साफ नहीं है कि उनकी ट्रेन आखिर किस रास्ते से जाएगी।
पूर्व रेलवे ने यात्रियों को भरोसा दिलाया था कि 27 दिसंबर को अमृतसर-हावड़ा मेल और 28 दिसंबर को राजेंद्र नगर-हावड़ा सुपरफास्ट ट्रेन को पटना, गया, धनबाद और आसनसोल होते हुए चलाया जाएगा। इसी रूट के आधार पर यात्रियों ने अपनी यात्रा की योजना बनाई, लेकिन स्टेशन पहुंचने पर उन्हें पता चला कि ट्रेनें बिल्कुल अलग दिशा में निकल चुकी हैं।
Jamui Train Accident Update: दानापुर मंडल का अलग फैसला
जानकारी के मुताबिक, दानापुर रेल मंडल ने इन दोनों ट्रेनों को तय परिवर्तित मार्ग के बजाय किउल, भागलपुर, गुमानी और बर्द्धमान होकर चलाने का फैसला कर लिया। इतना ही नहीं, इस बदले हुए रूट को इंटीग्रेटेड कोचिंग मैनेजमेंट सिस्टम (ICMS) में भी दर्ज कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि यात्रियों के पास न तो समय पर सूचना पहुंची और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। मामला तब और तूल पकड़ गया जब पूर्व रेलवे के हावड़ा मंडल के डीआरएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने साफ लिखा कि दानापुर रेल मंडल द्वारा की गई रूटिंग, पूर्व रेलवे के आधिकारिक COIS संदेश के अनुरूप नहीं है। यह टिप्पणी रेलवे के अंदरूनी तालमेल की कमी को उजागर करती है।
???? Operational Update | Howrah Division, Eastern Railway
Train No. 12352 (JCO – 28.12.2025) and 13006 (JCO – 27.12.2025) were officially diverted via PNBE–GAYA–DHN–ASN as per this office’s EO No. 211/12/2025 dated 28.12.2025, due to a obstruction on route in ASN Division /…
— DRM Howrah (@drmhowrah) December 29, 2025
यात्री परेशान
डीआरएम हावड़ा ने पूर्व मध्य रेल से तत्काल समन्वय स्थापित करने की अपील भी की, ताकि ट्रेनों के मार्ग निर्धारण में एकरूपता बनी रहे। उनका कहना था कि बिना तालमेल के ऐसे फैसले न केवल परिचालन को मुश्किल बनाते हैं, बल्कि यात्रियों की परेशानी कई गुना बढ़ा देते हैं। वहीं, यात्रियों का कहना है कि ठंड के मौसम में अचानक रूट बदल जाना उनके लिए किसी सजा से कम नहीं है। कई लोग अपने गंतव्य से सैकड़ों किलोमीटर दूर उतरने को मजबूर हुए। न स्टेशन पर स्पष्ट जानकारी मिली, न कोई वैकल्पिक सहायता मिल पाई।





