Israel News : भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रही सीजफायर बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने साफ कहा कि इजरायल पाकिस्तान को एक भरोसेमंद मध्यस्थ के तौर पर नहीं देखता। उनका कहना है कि अमेरिका ने अपने हितों के चलते पाकिस्तान को इस प्रक्रिया में शामिल किया है। रूवेन अजार ने कहा कि इजरायल इस पूरे मामले को लेकर अपनी स्थिति पहले ही साफ कर चुका है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका की अगुवाई में चल रही बातचीत से सकारात्मक नतीजे निकलेंगे। इजरायल चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल निर्माण को रोके, जो इस पूरी बातचीत का अहम हिस्सा है।
Israel ने जताया संदेह
इजरायली दूत ने लेबनान में चल रही सैन्य कार्रवाई पर भी खुलकर बात की। उन्होंने दावा किया कि हाल के घंटों में इजरायल ने बड़ा ऑपरेशन चलाते हुए 250 से ज्यादा हिज्बुल्लाह आतंकियों को मार गिराया है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई दक्षिणी लेबनान से हिज्बुल्लाह के नेटवर्क को खत्म करने के मकसद से की जा रही है। अजार ने कहा कि इजरायल किसी भी हालत में लिटानी नदी के दक्षिण में हिज्बुल्लाह की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने साफ किया कि इस इलाके को पूरी तरह आतंकवाद से मुक्त करना जरूरी है। साथ ही उन्होंने लेबनान सरकार से भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
ईरान-इजरायल तनाव के बीच बयान
यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान ने हाल ही में आरोप लगाया था कि इजरायल की कार्रवाई अमेरिका के साथ चल रहे संघर्ष-विराम को कमजोर कर रही है। दोनों देशों के बीच फिलहाल दो हफ्ते के लिए शत्रुता रोकने पर सहमति बनी थी। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर लेबनान में हमले जारी रहे तो यह सीजफायर समझौता टूट सकता है। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक इलाके में हालात फिर से बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिका और इजरायल का पक्ष
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया है कि लेबनान इस सीजफायर समझौते का हिस्सा नहीं है। दोनों नेताओं का कहना है कि लेबनान में चल रही कार्रवाई अलग मुद्दा है और इसका ईरान-अमेरिका समझौते से कोई सीधा संबंध नहीं है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी हुई है। एक तरफ जहां सीजफायर से शांति की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई ने हालात को जटिल बना दिया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि बातचीत सफल होती है या फिर तनाव और बढ़ता है।
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