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Iran War Strategy: हॉर्मुज पर कड़ा पहरा, इन जहाजों को दी इजाजत; लंबी जंग के बीच नई तैयारी

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Iran War Strategy : मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच Iran ने दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइनों में से एक Strait of Hormuz पर निगरानी और कड़ी कर दी है। 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए टकराव में United States और Israel के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर लगभग रोक लगा दी है। इस फैसले का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ने लगा है, क्योंकि दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से तेल की आपूर्ति करता है। ईरान ने साफ संकेत दिया है कि हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को उसकी शर्तों के अनुसार ही अनुमति मिलेगी। अधिकांश तेल जहाजों को फिलहाल रोक दिया गया है, जबकि कुछ सीमित जहाजों को ही रास्ता दिया जा रहा है।

यह कदम वैश्विक तेल सप्लाई के लिए चिंता का विषय बन गया है। ऊर्जा बाजार में भी इस वजह से अस्थिरता देखने को मिल रही है और कई देशों की नजर इस समुद्री मार्ग पर टिकी हुई है।

Iran War Strategy

तेल जहाजों पर सख्ती के बीच ईरान ने खाद्यान और कृषि उत्पाद लेकर आने वाले कुछ कार्गो जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि जंग के हालात में ईरान अपने देश की खाद्य आपूर्ति को सुरक्षित रखना चाहता है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो घरेलू जरूरतों को पूरा करना किसी भी देश के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है, इसलिए ईरान पहले से ही इस दिशा में तैयारी कर रहा है। मरीन ट्रैकिंग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, 15 और 16 मार्च को कम से कम छह जहाज हॉर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरे।

इन जहाजों ने ईरान के प्रमुख व्यावसायिक बंदरगाह Imam Khomeini Port पर अपना माल उतारा। इसके अलावा, 9 मार्च के बाद पांच और जहाज भी इसी मार्ग से गुजरकर वहां पहुंचे। इन जहाजों ने वैकल्पिक शिपिंग लेन का उपयोग किया और इनमें से एक जहाज कनाडा से सोयाबीन लेकर आया था।

खाद्य जरूरतों के लिए आयात पर निर्भरता

ईरान अपनी कुछ खाद्य जरूरतें खुद पूरी करता है, लेकिन अनाज और तेल बीजों के लिए उसे बड़े पैमाने पर आयात करना पड़ता है। इन उत्पादों का इस्तेमाल खाने के तेल और पशुओं के चारे के रूप में किया जाता है। यही वजह है कि मौजूदा हालात में खाद्यान से जुड़े जहाजों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि देश में आवश्यक वस्तुओं की कमी न हो। युद्ध की आशंका को देखते हुए ईरान ने पहले से ही अनाज का पर्याप्त भंडारण करने की रणनीति अपनाई थी। रिपोर्ट के मुताबिक जंग शुरू होने से पहले करीब 40 लाख टन गेहूं का स्टॉक तैयार कर लिया गया था। यह भंडार लगभग चार महीने तक देश की जरूरतों को पूरा कर सकता है। ईरान हर साल करीब 15 लाख टन मक्का का उत्पादन करता है, जबकि ब्राजील से 8 से 10 मिलियन टन मक्का आयात भी करता है।

पानी की कमी खेती के लिए बड़ी चुनौती

ईरान में खेती के सामने सबसे बड़ी समस्या पानी की कमी है। सूखे और सीमित जल संसाधनों के कारण कृषि उत्पादन लगातार दबाव में रहता है। यही वजह है कि देश को कई खाद्य उत्पादों के लिए बाहरी बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता है। मौजूदा जंग के हालात में खाद्य आपूर्ति को बनाए रखना ईरान की प्राथमिकता बन गया है और उसी रणनीति के तहत समुद्री रास्तों का इस्तेमाल सावधानी से किया जा रहा है।

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