Iran-US Tension : ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत और बढ़ाने का फैसला किया है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने करीब 2,500 मरीन सैनिकों की तैनाती की घोषणा की है। बताया जा रहा है कि इन सैनिकों को फारस की खाड़ी और आसपास के इलाकों में भेजा जा रहा है, जहां हाल के दिनों में जहाजों और ऊर्जा ढांचे पर हमलों का खतरा लगातार बढ़ गया है। इस कदम को वैश्विक तेल आपूर्ति की सुरक्षा से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, तैनात किए जा रहे सैनिक मुख्य रूप से 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट का हिस्सा हैं, जो आम तौर पर जापान में तैनात रहती है। इन जहाजों की मदद से समुद्र और जमीन दोनों मोर्चों पर तेज कार्रवाई करने की क्षमता बढ़ जाती है।
Iran-US Tension
इस यूनिट के साथ तीन बड़े एम्फीबियस युद्धपोत भी शामिल हैं, जिनमें यूएसएस त्रिपोली प्रमुख बताया जा रहा है। अमेरिका इस पूरे अभियान को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के नाम से चला रहा है। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए है और अपने हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है।
बी-2 स्टील्थ बमवर्षकों से हमले
अमेरिकी केंद्रीय कमान ने पुष्टि की है कि बी-2 स्टील्थ बमवर्षक विमानों ने ईरान के अंदर कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया है। इन हमलों का फोकस ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल सुविधाओं, मिसाइल निर्माण केंद्रों और नौसेना से जुड़े ढांचे पर रहा। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन ठिकानों को नष्ट कर भविष्य में ईरान की सैन्य क्षमता को फिर से खड़ा करना मुश्किल बनाने की कोशिश की जा रही है।
तेहरान में विस्फोट
इस बीच ईरान की राजधानी तेहरान से भी तनाव बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। सरकारी मीडिया के मुताबिक कुद्स दिवस के मौके पर हो रहे एक बड़े प्रदर्शन के दौरान एक चौक पर जोरदार विस्फोट हुआ। उस समय हजारों लोग प्रदर्शन में शामिल थे और इजरायल व अमेरिका के खिलाफ नारे लगा रहे थे। ईरान का दावा है कि मौजूदा संघर्ष में उसके यहां 1,300 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जबकि इजरायल ने अपने यहां 12 मौतों की पुष्टि की है।
तनाव के बीच अमेरिकी सेना को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। पश्चिमी इराक में केसी-135 टैंकर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें छह अमेरिकी चालक दल के सदस्यों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान अमेरिकी मौतों की संख्या बढ़कर कम से कम 13 हो गई है। घटना के कारणों की जांच जारी है।
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