Iran : 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू की। इस ऑपरेशन के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत की खबर सामने आई। हमले के तुरंत बाद पूरे ईरान में असाधारण हालात बन गए। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई। सरकारी इमारतों और सैन्य ठिकानों पर चौकसी बढ़ा दी गई, जबकि आम लोगों के बीच भय और अनिश्चितता का माहौल बन गया।
खामेनेई की मौत की खबर फैलते ही ईरान के अलग-अलग हिस्सों से दो तरह की तस्वीरें सामने आईं। एक ओर समर्थकों ने शोक सभाएं आयोजित कीं और काली पट्टियां बांधकर श्रद्धांजलि दी।
Iran में सत्ता का भूचाल
दूसरी ओर कुछ इलाकों में विरोधी गुटों ने पटाखे जलाकर और नारे लगाकर खुशी जाहिर की। यह विरोधाभासी माहौल इस बात का संकेत है कि देश के भीतर राजनीतिक ध्रुवीकरण कितना गहरा है। ईरानी मीडिया से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर खामेनेई की मौत की जानकारी दी। उन्होंने अपने संदेश में इसे “न्याय” बताया और कहा कि यह उन लोगों के लिए इंसाफ है जो ईरानी नीतियों से प्रभावित हुए। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई कि क्या किसी संप्रभु देश के शीर्ष नेता को निशाना बनाना वैश्विक नियमों के अनुरूप है।
रूस की चेतावनी
रूस ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी। राष्ट्रपति Vladimir Putin ने ईरान के राष्ट्रपति को पत्र लिखकर संवेदना जताई और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत ने भी चेतावनी दी कि यह कदम क्षेत्रीय संघर्ष को और व्यापक बना सकता है। मॉस्को ने साफ संकेत दिया कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ने से वैश्विक सुरक्षा पर असर पड़ेगा।
संप्रभुता का उठाया मुद्दा
China ने भी हमले की आलोचना की। चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर इसे ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन बताया। बीजिंग ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का हवाला देते हुए सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने की मांग की। चीन का कहना है कि ऐसे कदम अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी नियमों को कमजोर करते हैं। जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz ने कहा कि ईरान की जनता को अपने भविष्य का निर्णय स्वयं करने का अधिकार है। उन्होंने यह भी बताया कि बर्लिन लगातार अमेरिका और इजरायल के संपर्क में है। जर्मनी ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया, साथ ही इजरायल की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
फ्रांस-ब्रिटेन की अपील
Emmanuel Macron, Keir Starmer और जर्मनी के नेतृत्व ने संयुक्त बयान जारी कर तनाव कम करने की अपील की। तीनों देशों ने साफ किया कि वे इस हमले में शामिल नहीं थे, लेकिन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। बयान में कहा गया कि ईरान को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए और क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देनी चाहिए। खामेनेई की मौत ने ईरान की आंतरिक राजनीति और वैश्विक समीकरणों को हिला दिया है। सत्ता हस्तांतरण, संभावित विरोध प्रदर्शन और बाहरी दबाव इन सबके बीच हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह घटना सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई थी या पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़े बदलाव की शुरुआत।
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