Iran Pink Mosque : ईरान के शीराज शहर में एक ऐसी इमारत है, जहां सुबह का सूरज सिर्फ उजाला नहीं लाता, बल्कि रंगों से पूरी जमीन को सजा देता है। नसीर अल-मुल्क मस्जिद, जिसे दुनिया ‘पिंक मस्जिद’ के नाम से जानती है, वहां पहुंचते ही एहसास होता है कि यह कोई साधारण धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कला और प्रकृति की साझा कृति है। इस मस्जिद की पहचान इसकी रंगीन कांच की खिड़कियां हैं। जैसे ही सुबह की पहली किरणें इन कांचों से छनती हैं, अंदर का माहौल बदल जाता है। फर्श पर बिछे कालीनों पर लाल, नीले, पीले और बैंगनी रंग ऐसे उतरते हैं, मानो किसी चित्रकार ने कैनवास पर तूलिका चला दी हो।
‘पिंक मस्जिद’ नाम यूं ही नहीं पड़ा। इसकी दीवारों और स्तंभों पर गुलाबी टाइल्स का खूब इस्तेमाल किया गया है। फूलों और पारंपरिक फारसी डिजाइनों से सजी ये टाइल्स मस्जिद को एक अलग ही पहचान देती हैं। अंदर का नमाज हॉल रंगों और रोशनी के मेल से लगातार बदलता हुआ नजर आता है।
Iran की पिंक मस्जिद
नसीर अल-मुल्क मस्जिद का निर्माण काजार वंश के समय हुआ था। उस दौर में वास्तुकला केवल मजबूत इमारतें बनाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि सौंदर्य और भावना को भी उतनी ही अहमियत दी जाती थी। संगमरमर पर खुदी कविताएं और बारीक नक्काशी उस समय की सोच को दर्शाती हैं। इस मस्जिद की नींव मिर्जा हसन अली नसीर-उल-मुल्क ने रखी थी। शीराज के प्रभावशाली परिवार से ताल्लुक रखने वाले नसीर-उल-मुल्क ने इसे केवल इबादत के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक विरासत के रूप में बनवाया। निर्माण कार्य 19वीं सदी के अंत तक पूरा हुआ।
आंगन में ठहरता है वक्त
मस्जिद का आंगन अपने आप में एक शांत दुनिया है। बीच में बना फव्वारा, चारों ओर मेहराबें और खुला आसमान यह सब मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं, जहां वक्त मानो धीमा हो जाता है। यहां बैठकर लोग सिर्फ इबादत नहीं, खुद से भी मुलाकात करते हैं। समय के साथ पिंक मस्जिद शीराज की सबसे बड़ी पहचान बन गई। इसके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसे ईरान की राष्ट्रीय विरासत में शामिल किया गया। आज यह जगह श्रद्धालुओं के साथ-साथ दुनिया भर से आने वाले सैलानियों को भी अपनी ओर खींचती है।
नसीर अल-मुल्क मस्जिद यह साबित करती है कि वास्तुकला सिर्फ पत्थर और ईंटों का खेल नहीं होती। यहां रोशनी भी एक निर्माण सामग्री है, जो हर सुबह नई तस्वीर बनाती है और हर देखने वाले के दिल में अपनी जगह बना लेती है।
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