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Iran ने अमेरिका-इजरायल संघर्ष समाप्त करने की बताईं शर्तें, गारंटी की मांग

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Iran News : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने पूरे इलाके को तनाव के भंवर में डाल दिया है। पिछले करीब दो हफ्तों से ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा। मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच कई देशों की सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि अब इस जंग के बीच एक नया संकेत सामने आया है। ईरान की ओर से पहली बार खुले तौर पर युद्ध खत्म करने की संभावना पर बात की गई है, जिससे कूटनीतिक हल की उम्मीद जगी है।

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने संघर्ष को समाप्त करने के लिए तीन स्पष्ट शर्तें सामने रखी हैं। उनका कहना है कि किसी भी संभावित समझौते में ईरान के वैध अधिकारों को स्वीकार किया जाना जरूरी है।

Iran ने रखी शर्त

इसके साथ ही भविष्य में देश पर किसी भी तरह के सैन्य हमले को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस सुरक्षा गारंटी भी दी जानी चाहिए। तीसरी शर्त के रूप में उन्होंने युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग उठाई है।

जताई शांति की इच्छा

राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सोशल मीडिया मंच X पर एक पोस्ट के जरिए अपने रुख को सार्वजनिक किया। उन्होंने लिखा कि क्षेत्रीय शांति के लिए ईरान प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके लिए न्यायपूर्ण समाधान जरूरी है। उनके मुताबिक संघर्ष की शुरुआत अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई से हुई और इसे खत्म करने के लिए ईरान के अधिकारों को मान्यता देना ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने रूस और पाकिस्तान के नेताओं से भी बातचीत की है।

इस बीच ईरानी सेना की ओर से भी कड़ा बयान सामने आया है। सेना के प्रवक्ता Abolfazl Shekarchi ने सरकारी प्रसारण माध्यम IRIB से बातचीत में कहा कि अगर अमेरिका या उसके सहयोगी ईरान के बंदरगाहों को निशाना बनाते हैं तो उसका जवाब और भी व्यापक होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति में फारस की खाड़ी के किसी भी पोर्ट या आर्थिक केंद्र को सुरक्षित नहीं माना जाएगा।

खाड़ी क्षेत्र के पोर्ट बन सकते हैं लक्ष्य

ईरानी सैन्य प्रवक्ता ने साफ कहा कि यदि ईरानी पोर्ट या डॉक पर हमला होता है तो सेना पहले से कहीं बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर सकती है। उनके अनुसार ईरान की पहुंच पूरे क्षेत्र में मौजूद अहम बंदरगाहों और समुद्री ढांचों तक है। इस बयान को खाड़ी क्षेत्र के देशों के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है।

कूटनीति और टकराव के बीच फंसा संकट

विशेषज्ञों का मानना है कि एक तरफ ईरान शांति वार्ता का संकेत दे रहा है, तो दूसरी ओर सैन्य चेतावनियां भी जारी रख रहा है। इससे साफ है कि स्थिति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थता की कोशिशें तेज होती हैं, तो आने वाले दिनों में इस संघर्ष के समाधान की दिशा में कुछ ठोस कदम देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस संवेदनशील क्षेत्र की बदलती स्थिति पर टिकी हुई है।

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