Iran Currency Crisis : मध्य पूर्व के देश Iran ने अपनी मुद्रा प्रणाली में एक बड़ा कदम उठाते हुए 10 मिलियन यानी 1 करोड़ रियाल का नया बैंक नोट जारी किया है। यह देश के इतिहास में सबसे अधिक मूल्य वाला नोट माना जा रहा है। हालांकि इसकी वास्तविक कीमत ज्यादा नहीं है। भारतीय मुद्रा में इसकी वैल्यू करीब 650 रुपये के आसपास बैठती है, जबकि अमेरिकी डॉलर में यह लगभग 7 डॉलर के बराबर है। इससे साफ संकेत मिलता है कि हाल के वर्षों में रियाल की कीमत में कितनी तेज गिरावट आई है। ईरान की अर्थव्यवस्था इस समय कई तरह के दबावों से गुजर रही है। लगातार बढ़ती महंगाई और कमजोर होती मुद्रा के कारण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतना बड़ा नोट जारी करना उस आर्थिक स्थिति को दर्शाता है जिसमें महंगाई के कारण मुद्रा की क्रय शक्ति तेजी से घट रही है। ऐसे हालात में बड़ी कीमत वाले नोट जारी करना सरकार के लिए एक व्यावहारिक कदम बन जाता है।
Iran Currency Crisis
देश में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण लोगों को छोटी-छोटी खरीदारी के लिए भी ज्यादा नकदी की जरूरत पड़ रही है। इसी वजह से सरकार और केंद्रीय बैंक ने अधिक मूल्य वाले नोट जारी करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य बाजार में लेन-देन को आसान बनाना और नकदी के इस्तेमाल को सरल बनाना है। इससे बड़ी रकम के भुगतान के लिए लोगों को कम नोटों की जरूरत पड़ेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के दिनों में नकदी निकालने वालों की संख्या अचानक बढ़ गई है।
कई लोग बैंकिंग सिस्टम या डिजिटल भुगतान में संभावित रुकावट की आशंका के चलते अपने पास ज्यादा से ज्यादा कैश रखना चाहते हैं। इसी वजह से कई शहरों में एटीएम और बैंकों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग अपनी जमा पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए नकद निकालने में लगे हुए हैं।
लोगों की खरीदने की क्षमता पर असर
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भले ही 10 मिलियन रियाल का नोट देखने में बहुत बड़ा लगे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी वास्तविक कीमत बेहद कम है। इसका सीधा असर आम लोगों की क्रय शक्ति पर पड़ रहा है। महंगाई के कारण रोजमर्रा की चीजें महंगी होती जा रही हैं, जिससे लोगों के लिए खर्च संभालना मुश्किल हो गया है। इसके साथ ही बचत की वास्तविक कीमत भी घटती जा रही है। ईरान की आर्थिक स्थिति लंबे समय से चुनौतियों से घिरी रही है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, वैश्विक वित्तीय व्यवस्था तक सीमित पहुंच और घरेलू आर्थिक समस्याएं लगातार अर्थव्यवस्था पर असर डालती रही हैं।
हाल के क्षेत्रीय तनाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने इन मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े मूल्य के नोटों का चलन अक्सर गंभीर आर्थिक दबाव की ओर इशारा करता है, हालांकि इससे फिलहाल लेन-देन में कुछ हद तक सुविधा जरूर मिल सकती है।
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