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Indian Politics: लोकसभा स्पीकर ने संसद में की बैठक, साथ नजर आए कांग्रेस-बीजेपी के ये बड़े नेता; देखें Video

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Indian Politics : भारत की राजनीति इस वक्त तेज बहसों, टकराव और रणनीतिक बैठकों के दौर से गुजर रही है। एक तरफ संसद में कानूनों और नीतियों पर चर्चा हो रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक भी आम हो चुकी है। शीतकालीन सत्र के दौरान कई अहम मुद्दों पर हंगामा, विरोध और वॉकआउट देखने को मिले। ऐसे माहौल में संसद की कार्यवाही सिर्फ कानून बनाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह सत्ता और विपक्ष के रिश्तों का आईना भी बन जाती है। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन आया, जिसने उम्मीदों के विपरीत एक अचानक विराम के साथ सबको चौंका दिया।

19 दिसंबर 2025 को शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही ज्यादा समय नहीं चल सकी। सदन में वंदे मातरम के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।

Indian Politics: वीडियो वायरल

आमतौर पर आखिरी दिन लंबी चर्चा और औपचारिकताओं की उम्मीद की जाती है, लेकिन इस बार कार्यवाही का अंत बेहद संक्षिप्त रहा। दरअसल, लोकसभा स्थगित होने के बाद संसद भवन के भीतर एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। ओम बिरला ने अपने चैंबर में विभिन्न दलों के नेताओं और लोकसभा सांसदों के साथ मुलाकात की। यह बैठक औपचारिक कम और सौहार्दपूर्ण ज्यादा नजर आई, जिसमें सत्र के अनुभवों पर अनौपचारिक बातचीत हुई।

ये लोग हुए शामिल

इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए। उनके साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, चिराग पासवान, समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव समेत कई अन्य दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। सांसदों को चाय की चुस्कियों के बीच बातचीत करते देखा गया, जो हालिया संसदीय तनाव से बिल्कुल अलग नजारा था। उधर, राज्यसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे फिर से शुरू हुई, जिसकी अध्यक्षता उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने की। सदन में आवश्यक दस्तावेज, बयान और समितियों की रिपोर्ट टेबल पर रखी गईं। इसके बाद राज्यसभा को भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

व्यवहार पर टिप्पणी

राज्यसभा को स्थगित करते समय सभापति राधाकृष्णन ने सदस्यों के आचरण पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि एक दिन पहले मंत्री के जवाब के दौरान विरोध, नारेबाजी और कागजात फाड़ने जैसी घटनाएं सदन की गरिमा के अनुकूल नहीं थीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सदस्य अपने व्यवहार पर आत्ममंथन करेंगे। सभापति ने यह भी कहा कि कुल मिलाकर यह शीतकालीन सत्र उपयोगी रहा। शून्यकाल और प्रश्नकाल में उत्पादकता बढ़ी और कई उच्च स्तरीय बहसें हुईं। उनके अनुसार, संसदीय चर्चा का स्तर बेहतर रहा और आने वाले सत्रों में इसे और मजबूत किए जाने की जरूरत है।

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