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India vs Pakistan नो हैंडशेक विवाद, सामने आया टेम्बा बावुमा का रिएक्शन

T20WC 2026
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India vs Pakistan : भारत और पाकिस्तान की टीमें जब भी आमने-सामने आती हैं, मुकाबला सिर्फ रन और विकेट का नहीं रहता, भावनाएं भी उफान पर होती हैं। हाल के टूर्नामेंट में खिलाड़ियों का मैच के बाद हाथ न मिलाना नई बहस का कारण बन गया है। क्रिकेट के गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह रुख खेल की परंपरा के खिलाफ है या फिर एक संदेश देने का तरीका?

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान Temba Bavuma ने इस मुद्दे पर बेबाक प्रतिक्रिया दी। टी20 विश्व कप के दौरान कमेंट्री करते हुए उन्होंने कहा कि जो तस्वीरें दुनिया देख रही है, वे क्रिकेट की छवि के लिए ठीक नहीं हैं।

India vs Pakistan नो हैंडशेक विवाद

उनका मानना है कि क्रिकेट को ‘जेंटलमैन गेम’ कहा जाता है और इसमें एक खास तरह की मर्यादा की उम्मीद रहती है। बावुमा ने यह भी जोड़ा कि वे दोनों देशों के राजनीतिक हालात की बारीकियां नहीं जानते, लेकिन एक दर्शक के रूप में हाथ न मिलाना उन्हें असहज करता है। एशिया कप के दौरान भारतीय कप्तान Suryakumar Yadav और पाकिस्तान के कप्तान Salman Ali Agha के बीच मैच के बाद हाथ न मिलाने की घटना ने विवाद को हवा दी। बाद में भारतीय कप्तान ने स्पष्ट किया कि यह कदम पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए उठाया गया था। इस बयान के बाद मामला खेल से आगे बढ़कर भावनात्मक और राजनीतिक आयाम लेने लगा।

इंग्लैंड के दिग्गजों की प्रतिक्रिया

पूर्व इंग्लिश कप्तान Michael Vaughan ने इसे दुखद बताते हुए कहा कि हाथ मिलाना खेल की बुनियादी शिष्टाचार का हिस्सा है। उनके मुताबिक, यह परंपरा खिलाड़ियों के बीच सम्मान का प्रतीक रही है। वहीं Alastair Cook ने अलग नजरिया रखा। उनका कहना है कि कैमरों के सामने जो दिखता है, वह पूरी कहानी नहीं होता। पर्दे के पीछे खिलाड़ी अक्सर एक-दूसरे से सामान्य तरीके से मिलते हैं।

खिंची रेखा

भारत-पाक मुकाबलों में राजनीति की छाया नई नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि क्या मैदान पर दिखने वाली हर तस्वीर को राजनीतिक संदेश माना जाए? कई पूर्व खिलाड़ी मानते हैं कि खेल को खेल की तरह देखना चाहिए, जबकि कुछ का तर्क है कि खिलाड़ी भी समाज का हिस्सा हैं और भावनाएं जाहिर करने का हक रखते हैं। ‘नो हैंडशेक’ का यह मुद्दा आने वाले मैचों में भी चर्चा में रह सकता है। क्रिकेट प्रशंसक उम्मीद करते हैं कि रोमांच अपनी जगह बना रहे, लेकिन खेल भावना की परंपरा भी कायम रहे। आखिरकार, मुकाबला कितना भी तीखा हो, खेल का मूल मूल्य सम्मान ही है।

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