India Lauki Chadhane Wala Mandir : भारत में आस्था के कई ऐसे केंद्र हैं, जहां पूजा की परंपराएं बेहद अलग और रोचक होती हैं। कहीं भगवान को दूध चढ़ाया जाता है तो कहीं मिठाई या फल। लेकिन आंध्र प्रदेश में एक ऐसा मंदिर भी है जहां भक्त भगवान को लौकी अर्पित करते हैं। यह अनोखा मंदिर चित्तूर जिले के नारायणवरम इलाके में स्थित Sri Sorakayala Swamy Temple है। यहां आने वाले श्रद्धालु पूजा के दौरान लौकी चढ़ाते हैं और इसे अपनी श्रद्धा का प्रतीक मानते हैं। मंदिर की दीवारों और छत पर लटकी असंख्य लौकियां इस परंपरा की गवाही देती हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर की परंपरा एक महान संत से जुड़ी है। माना जाता है कि 19वीं सदी के अंत में यहां एक अवधूत संत रहते थे, जिन्हें Sri Sorakaya Swamy के नाम से जाना जाता है।
India का अनोखा धाम
उनका जन्म करीब 1875 के आसपास बताया जाता है। साधारण वेशभूषा में रहने वाले इस संत को लोग चमत्कारी शक्ति वाला मानते थे। कहा जाता है कि वे जड़ी-बूटियों और घरेलू चीजों की मदद से लोगों की बीमारियों और परेशानियों को दूर करने में मदद करते थे। तेलुगु भाषा में ‘सोरकाया’ शब्द का अर्थ लौकी होता है। बताया जाता है कि संत अपने साथ हमेशा एक लौकी रखते थे। उनका जीवन बेहद सादगी से भरा हुआ था और वे जरूरतमंदों की मदद के लिए भिक्षा भी मांगते थे। माना जाता है कि इसी साधारण वस्तु से जुड़ी उनकी पहचान के कारण भक्तों ने मंदिर में लौकी चढ़ाने की परंपरा शुरू की। समय के साथ यह परंपरा इतनी लोकप्रिय हो गई कि आज मंदिर की पहचान ही इसी अनोखी भेंट से होती है।
भक्तों की आस्था
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां दर्शन करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन को शांति मिलती है। कई लोग अपनी मनोकामना पूरी होने की कामना लेकर यहां आते हैं और लौकी चढ़ाकर पूजा करते हैं। मंदिर परिसर में लटकी हजारों लौकियां इस बात का प्रतीक हैं कि सच्ची श्रद्धा दिखावे या महंगे चढ़ावे से नहीं, बल्कि सादगी से भी व्यक्त की जा सकती है।
कैसे पहुंचें इस अनोखे मंदिर तक
अगर कोई भक्त इस खास मंदिर के दर्शन करना चाहता है तो यहां पहुंचना ज्यादा मुश्किल नहीं है। यह स्थान Tirupati से करीब 38 किलोमीटर दूर स्थित है। वहीं Bengaluru से इसकी दूरी लगभग 250 किलोमीटर है। मंदिर के सबसे नजदीक Puttur कस्बा है, जो करीब पांच किलोमीटर दूर पड़ता है। यात्री ट्रेन, बस या फ्लाइट के जरिए पहले तिरुपति पहुंच सकते हैं और वहां से सड़क मार्ग से नारायणवरम तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
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