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India-UAE की 3 अरब डॉलर की बड़ी डील, ऊर्जा समझौते से लेकर रक्षा ताकत तक मजबूत होती रणनीतिक साझेदारी

India-UAE
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India-UAE : भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच रणनीतिक सहयोग को एक नई गति मिली है। दोनों देशों ने ADNOC गैस और HPCL के बीच करीब 3 अरब डॉलर के LNG सप्लाई एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी को और गहरा कर दिया है। यह समझौता केवल ऊर्जा आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के दीर्घकालिक रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग को भी मजबूती देता है।

इस डील का मुख्य उद्देश्य भारत की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित और स्थिर बनाना है। LNG सप्लाई समझौते से भारत को दीर्घकालिक गैस आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे औद्योगिक विकास, बिजली उत्पादन और घरेलू गैस खपत को बल मिलेगा। वहीं, यूएई के लिए यह समझौता एशिया में अपनी ऊर्जा बाजार पकड़ को मजबूत करने का अवसर है।

India-UAE की बड़ी डील

बीते एक दशक में भारत ने रक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। देश अब केवल हथियार आयात करने वाला नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर रक्षा उपकरणों का निर्माण करने वाला राष्ट्र बन चुका है। सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत पहल के चलते घरेलू रक्षा उद्योग को नई पहचान मिली है। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2015-16 में भारत का रक्षा उत्पादन करीब 53,000 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 तक बढ़कर 1,50,600 करोड़ रुपये हो गया है। यह लगभग 184 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

डिफेंस एक्सपोर्ट में ऐतिहासिक उछाल

भारत का रक्षा निर्यात भी अभूतपूर्व गति से बढ़ा है। जहां 2015-16 में रक्षा निर्यात करीब 2,100 करोड़ रुपये था, वहीं 2025-26 तक यह बढ़कर 26,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह 1000 प्रतिशत से अधिक की बढ़त को दर्शाता है और भारत को एक उभरते हुए वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करता है। अंतरराष्ट्रीय रक्षा अनुसंधान संस्थानों के अनुसार, भारत के रक्षा निर्यात का बड़ा हिस्सा पड़ोसी और हिंद महासागर क्षेत्र के देशों में जाता है। म्यांमार भारत का सबसे बड़ा रक्षा ग्राहक है, जहां लगभग 31 प्रतिशत निर्यात होता है। इसके बाद श्रीलंका और मॉरीशस प्रमुख खरीदार हैं। इसके अलावा, सेशेल्स और आर्मेनिया जैसे देशों के साथ भी रक्षा संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।

व्यापक रणनीतिक असर

भारत और यूएई के बीच हुआ यह LNG समझौता केवल ऊर्जा सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा। इससे दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, निवेश और रणनीतिक संवाद को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी संयुक्त रक्षा परियोजनाओं, तकनीकी सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभा सकती है। भारत आज अमेरिका, फ्रांस और रूस जैसे देशों के साथ रक्षा क्षेत्र में गहरे सहयोग में है। अमेरिका के साथ लॉजिस्टिक्स, सुरक्षित संचार और संयुक्त सैन्य अभ्यास बढ़ रहे हैं। फ्रांस के साथ फाइटर जेट्स और रक्षा तकनीक पर साझेदारी है, जबकि रूस के साथ मिसाइल, सबमरीन और ब्रह्मोस जैसे संयुक्त प्रोजेक्ट्स जारी हैं।

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