India : पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। युद्ध जैसे हालात के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव तेज हो गया है और कई देश ऊर्जा संकट की आशंका जता रहे हैं। इसी बीच भारत ने एक अहम रणनीतिक फैसला लेते हुए अपने आपातकालीन तेल भंडार को जारी करने से इनकार कर दिया है। सरकार का कहना है कि फिलहाल देश की ऊर्जा जरूरतें सुरक्षित हैं और जल्दबाजी में भंडार का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की ओर से सदस्य देशों को सुझाव दिया गया था कि बढ़ती कीमतों को काबू में रखने के लिए आपातकालीन तेल भंडार जारी किए जाएं।
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हालांकि, भारत ने इस प्रस्ताव में शामिल होने से दूरी बना ली है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा संकट भारत की वजह से नहीं पैदा हुआ है, इसलिए देश की प्राथमिकता अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसी कारण रणनीतिक भंडार को केवल आपूर्ति में वास्तविक बाधा आने पर ही इस्तेमाल किया जाएगा। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि ऊर्जा से जुड़े फैसलों में भारत की प्राथमिकता हमेशा राष्ट्रीय हित रहेगी। इसी सोच के तहत रणनीतिक भंडार को सुरक्षित रखा जा रहा है। भारत के पास करीब 5.33 मिलियन टन क्षमता वाला रणनीतिक तेल भंडार है, जिसमें फिलहाल लगभग 80 प्रतिशत तक भंडारण मौजूद है। सरकार का मानना है कि इस स्टॉक का इस्तेमाल केवल आपातकालीन स्थिति में ही किया जाना चाहिए।
सप्लाई फिलहाल सुरक्षित
सरकारी सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन यानी एटीएफ का पर्याप्त भंडार मौजूद है। मौजूदा हालात में सप्लाई को लेकर किसी तरह की कमी की संभावना नहीं है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि ईंधन के निर्यात पर कोई रोक लगाने की योजना नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर नहीं जाती, तो घरेलू कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की आशंका कम रहेगी।
अतिरिक्त तैयारी
संभावित जोखिम को देखते हुए भारत ने पहले से ही कुछ रणनीतिक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। रूस से अतिरिक्त कच्चा तेल खरीदने की प्रक्रिया तेज की गई है। इसके अलावा अमेरिका और कनाडा से अतिरिक्त एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी वैश्विक संकट के बावजूद देश में ऊर्जा की उपलब्धता प्रभावित न हो।
सरकार की नजर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में कहा कि पश्चिम एशिया के हालात चिंताजनक हैं और सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए दो प्राथमिकताएं सबसे अहम हैं। देश की ऊर्जा सुरक्षा और उस क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा। वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी चेतावनी दी है कि यदि हालात और बिगड़े तो होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
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