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India-EU ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट फाइनल, कपड़े सहित प्रोसेस्ड फूड जैसे कई उत्पाद होंगे सस्ते; बढ़ेगी व्यापारियों की चिंता!

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India-EU : भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुआ नया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। यूरोपीय नेताओं ने इसे अब तक की सबसे अहम व्यापारिक डील करार दिया है। इस समझौते से करीब 2 अरब लोगों को एक साझा फ्री ट्रेड ज़ोन का फायदा मिलेगा, जहां वस्तुओं और सेवाओं का लेन-देन पहले से आसान और सस्ता हो सकेगा। आने वाले वर्षों में इसका असर भारत के व्यापार, उपभोक्ता बाजार और औद्योगिक रणनीति पर साफ दिखाई दे सकता है।

इस डील के तहत भारत ने यूरोप से आयात होने वाले कई उत्पादों पर टैक्स कम करने या खत्म करने का फैसला किया है। इससे ऑलिव ऑयल, वेजिटेबल ऑयल, फ्रूट जूस, प्रोसेस्ड फूड और मार्जरीन जैसे सामानों की कीमतें घट सकती हैं।

India-EU ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट फाइनल

यूरोपीय फैशन ब्रांड्स, कपड़े और लाइफस्टाइल प्रोडक्ट्स भी भारतीय ग्राहकों के लिए अधिक किफायती हो सकते हैं। शहरी उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स तक आसान और सस्ती पहुंच मिलने की उम्मीद है। इस समझौते का सबसे चर्चित पहलू विदेशी शराब पर टैक्स में संभावित कटौती है। अब तक यूरोप से आने वाली वाइन और व्हिस्की पर भारी शुल्क लगता था, लेकिन नई डील के बाद यह टैक्स काफी कम हो सकता है।

इसका सीधा असर प्रीमियम लिकर सेगमेंट पर पड़ेगा, जहां कीमतें घटने से मांग बढ़ सकती है। इससे होटल, बार और लग्ज़री रिटेल सेक्टर को फायदा मिलने की संभावना है, हालांकि देसी ब्रांड्स के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

यूरोपीय कंपनियों को बड़ा फायदा

EU के अनुसार, इस समझौते के तहत भारत ने उसके लगभग 96 प्रतिशत निर्यात पर टैरिफ घटाने या हटाने का वादा किया है। इससे यूरोपीय कंपनियों को हर साल अरबों यूरो की टैक्स बचत हो सकती है। यूरोप को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में भारत के साथ उसका व्यापार कई गुना बढ़ेगा। मशीनरी, ऑटोमोबाइल, केमिकल और टेक्नोलॉजी सेक्टर में यूरोपीय निवेश के नए रास्ते खुल सकते हैं।

देखें लिस्ट

निर्यात श्रेणी कुल मूल्य (अमेरिकी डॉलर) मुख्य उप-श्रेणियां / विवरण
पेट्रोलियम उत्पाद $15.0 बिलियन डीजल: $9.3 बिलियन, एटीएफ (विमान ईंधन): $5.4 बिलियन
इलेक्ट्रॉनिक्स $11.3 बिलियन स्मार्टफोन: $4.3 बिलियन
कार्बनिक रसायन $5.1 बिलियन
मशीनरी, कंप्यूटर $5.0 बिलियन टर्बोजेट: $756 मिलियन
लोहा और इस्पात $4.9 बिलियन
कपड़ा और परिधान $4.5 बिलियन लड़कियों के सूट: $4.5 बिलियन*, मेड अप्स: $1.2 बिलियन
दवा (फार्मास्यूटिकल्स) $3.0 बिलियन
रत्न और आभूषण $2.5 बिलियन हीरे: $1.6 बिलियन
ऑटो पार्ट्स $1.6 बिलियन
टायर $890 मिलियन
जूते-चप्पल $809 मिलियन
कॉफी $775 मिलियन

ग्रीन एनर्जी और जलवायु सहयोग

यह डील व्यापार सहित पर्यावरण और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर भी है। यूरोपीय यूनियन भारत में ग्रीन इंडस्ट्री, क्लीन एनर्जी और कार्बन उत्सर्जन कम करने वाली परियोजनाओं के लिए सैकड़ों मिलियन यूरो की फंडिंग की योजना बना रहा है। इससे रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और इको-फ्रेंडली मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिल सकता है। इस समझौते से भारतीय कंपनियों को यूरोप में अपने उत्पाद बेचने के लिए बड़ा और आसान बाजार मिलेगा, खासकर कपड़ा, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो पार्ट्स सेक्टर को फायदा हो सकता है।

दूसरी ओर, यूरोप से आने वाले सस्ते सामान घरेलू उद्योगों पर दबाव बढ़ा सकते हैं। अगर इंपोर्ट तेजी से बढ़ा और एक्सपोर्ट उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ा, तो व्यापार घाटा भी एक चिंता का विषय बन सकता है।

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