India : नई दिल्ली में गुरुवार को आयोजित तीसरे नेशनल रोड सेफ्टी कॉन्क्लेव में सड़क हादसों का मुद्दा केंद्र में रहा। कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश में बढ़ते सड़क हादसों के आंकड़े साझा करते हुए चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत में हर साल लगभग पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं दर्ज होती हैं और इनमें करीब 1.80 लाख लोगों की जान चली जाती है। यह स्थिति केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक संकट है।
गडकरी ने साफ कहा कि कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, असली चुनौती उन्हें जमीन पर लागू करने की है। उनके मुताबिक, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और लोगों के व्यवहार में लापरवाही सड़क सुरक्षा के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा है।
India में सालाना 5 लाख सड़क हादसे
ओवरस्पीडिंग, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के सफर करना आम बात बन चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक नागरिक खुद जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक हालात में बड़ा सुधार मुश्किल है। मंत्री ने बताया कि ओवरस्पीडिंग से हर साल लगभग 1.20 लाख लोगों की जान जाती है। हेलमेट न पहनने के कारण 54 हजार से ज्यादा मौतें होती हैं, जबकि सीट बेल्ट न लगाने से 14 हजार से अधिक लोग जान गंवाते हैं। इसके अलावा 18 साल से कम उम्र के करीब 10 हजार बच्चों की मौतें भी सड़क हादसों में होती हैं। नशे में ड्राइविंग, गलत दिशा में वाहन चलाना और मोबाइल फोन का इस्तेमाल भी दुर्घटनाओं की बड़ी वजह हैं।
अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर
सड़क हादसों का असर सिर्फ परिवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। गडकरी ने बताया कि दुर्घटनाओं के कारण भारत की जीडीपी को करीब तीन प्रतिशत तक का नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि यह नीति निर्माताओं के लिए गंभीर चुनौती है, क्योंकि सड़क सुरक्षा में सुधार सीधे तौर पर आर्थिक विकास से जुड़ा है।
वाहनों में बढ़ाई जा रही सुरक्षा
गडकरी ने यह भी बताया कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में सुरक्षा मानकों को वैश्विक स्तर के अनुरूप बनाया जा रहा है। अब कारों में छह एयरबैग अनिवार्य किए जा रहे हैं। भारी वाहनों में ऐसी तकनीक लाई जा रही है जो आपात स्थिति में स्वतः ब्रेक लगा सके। उनका कहना था कि तकनीक मदद कर सकती है, लेकिन सड़क सुरक्षा की असली कुंजी जागरूकता और अनुशासन ही है।
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