पूर्वी चंपारण में उफनती गंडक में समा गए 50 घर, साखवां टोंक गांव के 250 लोगों ने तटबंध पर ली शरण

पूर्वी चंपारण के अरेराज प्रखंड स्थित साखवां टोंक गांव गंडक नदी में विलीन हो गया है। इस गांव के 50 घरों में लगभग ढाई सौ लोग रहते थे। गंडक नदी में चौथी बार आई बाढ़ में नदी के कटाव की जद में पूरा गांव आ गया। साखवां टोक गांव पूर्वी चंपारण व गोपालगंज जिला बॉर्डर पर गंडक नदी की दो धाराओं के बीच मे बसा था, जिसे गंडक नदी ने अपने आगोश में ले लिया है। जलस्तर के बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर उक्त गांव के सभी लोगों को गांव खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सूचना दे दी गई थी। इसके तहत गांव के सभी लोग गोपालगंज जिला के सारण तटबंध पर जाकर शरण लिए हुए थे।

गांव में सरकारी विद्यालय, नल जल सहित अन्य सभी सुविधाएं उपलब्ध थी। इस गांव के बेखर हुए लोगों के पास रहने की कौन कहे खाने तक के लिए कुछ भी नहीं है। लोग किसी प्रकार अपनी भूख मिटा रहे हैं। गांव के योगेंद्र यादव, बिट्टू यादव, बृजेश यादव सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि गांव के सभी लोग परिवार के साथ घर से बेघर हो गए हैं। ऐसे में विस्थापित हुए परिवार के लोगों के सामने रहने व खाने के लाले पड़ गए हैं। 2001 में नगदाहां गांव बांध के अंदर बसा साखवां टोंक गांव गंडक नदी में विलीन हो गया था। गांव के विलीन होने से लगभग एक हजार परिवार विस्थापित हो गए थे। इसमें से कुछ लोग नगदाहां पंचायत के ही नयका टोला में बसे हुए हैं। साखवां टोंक गांव के एक दर्जन लोग अरेराज अंचल में पहुंचे।

पूरे गांव के गंडक में विलीन होने की जानकारी स्थानीय प्रशासन को नहीं थी। 9 परिवार के लोग अंचल कार्यालय पहुंचे तथा साखवां टोंक गांव के गंडक में समाने की सूचना दी, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में अरेराज अंचलाधिकारी पवन कुमार झा ने विस्थापित हुए 9 लोगों को प्लास्टिक व सूखा राशन दिया है। विस्थापित योगेन्द्र यादव, बालदेव यादव, मुंजेश यादव, बिट्टू यादवआदि ने बताया कि कटाव के बाद वह लोग जैसे-तैसे वे जान बचाकर गोपालगंज के चंपारण चटबंध पर जाकर शरण ली। वहां से अरेराज पहुंच कर जानकारी दी। स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि सह समाजसेवी कामेंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि वहां के लोगों को बाढ़ राहत राशि मिलनी थी, अधिकांश लोगों को सहायता राशि प्राप्त हो गई है। कुछ लोगों की राशि कागजात की गड़बड़ी से लंबित है। सीओ ने बताया कि जैसे ही पानी कम होगा क्षति का आकलन किया जाएगा और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अभी वहां पानी का बहाव अति तीव्र है, अतः वहां जाना खतरनाक है। पानी कम होने के बाद स्थिति का जायजा लिया जाएगा। जिन लोगों को राहत राशि नहीं मिली है, उनके कागजात को देख यथाशीघ्र राशि उपलब्ध कराई जाएगी।

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