Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ सरकार ने जमीन से जुड़े कामों में आम लोगों की परेशानी कम करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश में जमीन का डायवर्सन कराने के लिए न तो बार-बार एसडीएम कार्यालय जाना पड़ेगा और न ही महीनों तक फाइल अटकने का डर रहेगा। सरकार ने भूमि डायवर्सन की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है, जिससे किसान और जमीन मालिक घर बैठे आवेदन कर सकेंगे।
राजस्व विभाग ने इस नई व्यवस्था की अधिसूचना शनिवार को राजपत्र में प्रकाशित कर दी है। इसके बाद यह नियम पूरे प्रदेश में लागू हो गया है। सरकार के अनुसार, इस बदलाव से जमीन से जुड़े काम आसान होंगे और लोगों को समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
Chhattisgarh: अनुमति के झंझट से राहत
नए नियमों के तहत, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन के डायवर्सन के लिए अब पहले से किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। जमीन मालिक सीधे सरकारी पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकेंगे। यह आवेदन ऑनलाइन ही संबंधित जिले के एसडीएम तक पहुंचेगा। एसडीएम को आवेदन मिलने के बाद 15 दिनों के भीतर आदेश जारी करना अनिवार्य होगा। अगर किसी वजह से तय समय में आदेश नहीं दिया गया, तो 16वें दिन सिस्टम अपने आप उस आवेदन को मंजूरी मान लेगा। अब फाइल दबाने या अनावश्यक देरी की गुंजाइश नहीं रहेगी।
Chhattisgarh: भ्रष्टाचार पर लगेगा लगाम
सरकार का मानना है कि ऑनलाइन प्रक्रिया से पूरे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी। हर आवेदन का रिकॉर्ड डिजिटल रहेगा, जिससे यह साफ रहेगा कि फाइल कहां तक पहुंची है और कितने दिन से लंबित है। इससे अघोषित लेन-देन और मनमानी पर भी रोक लगेगी। अब तक कई मामलों में लोगों को महीनों तक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। कई बार बिना अतिरिक्त खर्च किए काम आगे ही नहीं बढ़ता था। नई व्यवस्था से ऐसे हालात काफी हद तक खत्म होने की उम्मीद है।
प्रीमियम दरें भी तय
सरकार ने भूमि डायवर्सन के लिए प्रीमियम दरें भी स्पष्ट कर दी हैं। नगर निगम और नगरपालिका क्षेत्रों में यह दरें 3 रुपए से लेकर 25 रुपए प्रति वर्गमीटर तक तय की गई हैं। अलग-अलग उपयोग के हिसाब से दरें अलग होंगी। इनमें आवासीय उपयोग, कॉलोनी विकास, व्यावसायिक काम, उद्योग, मिश्रित उपयोग, सार्वजनिक सुविधाएं, संस्थागत उपयोग, अस्पताल और चिकित्सा सेवाएं साथ ही विशेष आर्थिक क्षेत्र शामिल हैं। इससे जमीन मालिकों को पहले से ही यह पता रहेगा कि उन्हें कितना शुल्क देना होगा।
इन्हें होगा फायदा
यह व्यवस्था सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण इलाकों के किसानों और जमीन मालिकों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा। अब उन्हें छोटे-छोटे कामों के लिए तहसील और एसडीएम कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार का दावा है कि इससे लंबित मामलों में तेजी से कमी आएगी और जमीन से जुड़े निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। खासतौर पर आवास और छोटे उद्योग लगाने वालों के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है।





