बिहार में एक दिन में 4-4 जनता दरबार, विपक्ष का आरोप-अफसर लोगों की नहीं सुनते इसलिए दिखावे के लिए लगा रहे दरबार

बिहार की राजधानी में इन दिनों रोज जनता दरबार लग रहा है। एक दिन में चार-चार जनता दरबार लगाए जाते हैं। अलग- अलग जगहों पर बिहार सरकार के मंत्री बैठ कर आम लोगों की समस्या के लिए जनता दरबार लगा रहे हैं। बिहार की सत्ता में जितने भी दल शामिल हैं उनके मंत्री जनता दरबार लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2016 के बाद से एक बार फिर जनता दरबार शुरू किया है। वहीं, जनता दरबार को लेकर राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने मीडिया से बातचीत में शुक्रवार को कहा कि यह सिर्फ दिखावा है। अधिकारी आम लोगों की सुनते ही नहीं हैं।

2016 में CM नीतीश कुमार ने कहा था कि लोक शिकायत अधिनियम कानून के तहत आम लोगों की समस्याओ का निदान होने लगा है। अब जनता दरबार करने की जरूरत नहीं है। लेकिन, पांच साल के बाद CM नीतीश कुमार और उनकी सरकार को एहसास हुआ कि लोक शिकायत अधिनियम से लोगों की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। अधिकारी लोगों की नहीं सुनते हैं। हजारों मामले लंबित हो गए। ऐसे में लोग भी मांग कर रहे थे कि जनता दरबार शुरू होना चाहिए। इसके बाद CM ने महीने के तीन सोमवार को दरबार लगाना शुरू कर दिया। फिर शुरू हुआ जनता दरबार लगाने का दौर। एक एक दिन में चार-चार दरबार लगाए जाने लगे।

महीने के मंगलवार को तो चार-चार दरबार लगाए जाते हैं। इस दिन BJP के तरफ से दो दरबार लगाए जाते तो JDU और HAM के मंत्री अलग-अलग दरबार लगाते हैं। इस दिन उप मुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद अपने सरकारी आवास पर दरबार लगाते हैं तो मंगलवार को ही BJP प्रदेश कार्यालय में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय और उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन सहयोग कार्यक्रम करते हैं। वही, पूर्व CM जीतनराम मांझी के मंत्री पुत्र संतोष मांझी भी मांझी के सरकारी आवास पर जनता दरबार लगा रहे हैं। यहां तक कि CM नीतीश कुमार सोमवार को जब जनता दरबार करते हैं तो BJP के मंत्री भी दूसरी तरफ प्रदेश कार्यालय में जनता दरबार लगा रहे हैं।

जनता दरबार लगाने के पीछे सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि लोगों की समस्या का समाधान मिलजुल कर ही करना होगा। तभी लोगों की समस्याएं दूर होगी। BJP प्रवक्ता अखिलेश सिंह कहते हैं कि BJP में सहयोग कार्यक्रम शुरू से चलता रहा है और पार्टी कार्यालय में लगातार मंत्री बैठे रहे हैं। कोरोना और चुनाव के कुछ दिनों में यह कार्यक्रम स्थगित था। लेकिन, अक्सर यह कार्यक्रम चलता रहा है। वहीं, JDU के प्रवक्ता अभिषेक झा कहते हैं कि हम लोगों का उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की समस्याओं का निदान करें। सुशासन की सरकार में सबके साथ न्याय होना चाहिए। वहीं, RJD के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी कहते हैं कि नीतीश कुमार और उनके मंत्री ये जनता दरबार लगाकर दिखावा कर रहे हैं। इनसे कुछ नहीं होने वाला है। जो करना है अधिकारियों को करना है और अधिकारी किसी की सुनते नहीं हैं। यदि अधिकारी सुनते तो लोक शिकायत अधिकार अधिनियम फ्लॉप नही होता।

सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावा मंगलवार को शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी, खाद्य आपुर्ति मंत्री लेसी सिंह और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान जनता दरबार लगाएंगे। वहीं, बुधवार को ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, मद्य निषेद्य मंत्री सुनील कुमार और ग्रामीण कार्य मंत्री जयंत राज पार्टी कार्यालय में जनता दरबार लगाएंगे। गुरुवार को उर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, परिवहन मंत्री शीला मंडल और समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी को और शुक्रवार को भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी, जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा और विज्ञान प्राविधिक मंत्री सुमित कुमार सिंह जनता दरबार लगा रहे हैं।

BJP के शेड्यूल के अनुसार सोमवार को पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री नीरज कुमार सिंह व श्रम संसाधन एवं सूचना मंत्री जिवेश मिश्रा, जबकि मंगलवार को उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन लोगों की शिकायत सुनेंगे। इसी तरह बुधवार को पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामसूरत राय, कला, संस्कृति एवं युवा मंत्री आलोक रंजन झा, वृहस्पतिवार को गन्ना उद्योग एवं विधि मंत्री प्रमोद कुमार, पर्यटन मंत्री नारायण प्रसाद व सहकारिता मंत्री सुभाष सिंह, शुक्रवार को कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह, खान एवं भूतत्व मंत्री जनक राम, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री रामप्रीत पासवान, शनिवार को उपमुख्यमंत्री रेणु देवी जनता दरबार के रूप में सहयोग कार्यक्रम कर रही हैं।

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