सरकारी यात्रा को चुनावी बनाया तो चलेगा आचार संहिता उल्लंघन का डंडा, नप जाएंगे मंत्री से लेकर सांसद और विधायक

पंचायत चुनाव में पर्दे के पीछे से जोर आजमाईश कर रही राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनावी मैदान में कई खतरे हैं। अधिसूचना जारी होते ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से जारी आदर्श आचार संहिता में मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के लिए भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक, केन्द्र या राज्य सरकार के मंत्री ही नहीं विधायक, विधान पार्षद और सांसद भी अपने सरकारी यात्रा को चुनावी यात्रा से बिल्कुल अलग रखेंगे। दोनों यात्राओं को एक साथ नहीं किया जाएगा।

मंत्री यदि जिला मुख्यालय या क्षेत्रीय स्तर के कार्यालयों तक सरकारी कार्यों के सिलसिले में जाते हैं और उसके बाद निजी वाहन के माध्यम से चुनावी यात्रा करते हैं तब भी पूरे दौरे को चुनावी दौरा माना जाएगा। साथ ही वो उम्मीदवार जिनके साथ मंत्री देखे जाएंगे उसके चुनावी खर्चे में मंत्री के पूरे दौरे का खर्च जोड़ दिया जाएगा। सरकारी वाहन से लेकर सरकारी भवन के चुनाव कार्यों के लिए उपयोग पर भारतीय दंड संहिता की धारा 171 (c) के तहत कार्रवाई होगी। इसके तहत दोष सिद्ध होने पर तीन महीने कारावास की सजा या दो सौ रुपए आर्थिक दंड हो सकता है या दोनों ही हो सकता है। यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है। इसकी सुनवाई मजिस्ट्रेट करेंगे।

राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान के दिन के लिए वाहनों के परिचालन को लेकर खास निर्देश दिए हैं। इसके मुताबिक, मतदान के दिन जिला परिषद् सदस्य पद के उम्मीदवार एक हल्का मोटर वाहन का उपयोग करेंगे। पंचायत समिति सदस्य उम्मीदवार दो पहिया वाहन, मुखिया पद उम्मीदवार एक दो पहिया वाहन से घूमेंगे। इसी तरह सरपंच पद के उम्मीदवार भी दो पहिया वाहन से घूमेंगे। जबकि, ग्राम पंचायत सदस्य और पंच पैदल घूमेंगे।

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