IDFC First Bank Share : सोमवार सुबह बाजार खुलते ही IDFC First Bank के निवेशकों को बड़ा झटका लगा। बीएसई पर करीब 10 बजे बैंक का शेयर 18 फीसदी से ज्यादा टूटकर 68 रुपये के आसपास पहुंच गया। अचानक आई इस गिरावट की वजह चंडीगढ़ शाखा से जुड़े 590 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड का खुलासा रहा, जिसने बैंकिंग सेक्टर में हलचल पैदा कर दी।
बैंक की रेगुलेटरी फाइलिंग के मुताबिक, चंडीगढ़ शाखा के कुछ कर्मचारी हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में संदिग्ध लेनदेन में शामिल पाए गए हैं। शुरुआती जांच के आधार पर चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। बैंक ने स्पष्ट किया है कि मामले की आंतरिक जांच जारी है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
IDFC First Bank Share
मामले के सामने आते ही Haryana Finance Department ने रविवार को सर्कुलर जारी कर राज्यभर में इस बैंक और AU Small Finance Bank को डी-एम्पेनल कर दिया। यानी अब इन बैंकों के जरिए कोई भी सरकारी फंड जमा, निवेश या ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे शेष राशि अन्य बैंकों में स्थानांतरित कर खाते बंद करें।
फोरेंसिक ऑडिट
बैंक प्रबंधन ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही संदिग्ध खातों में मौजूद राशि को सुरक्षित रखने के लिए संबंधित बैंकों को रिकॉल रिक्वेस्ट भेजी गई है। मामले की गहराई से जांच के लिए स्वतंत्र बाहरी एजेंसी से फोरेंसिक ऑडिट कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बैंक का कहना है कि कानून के तहत सिविल और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
कैसे सामने आया मामला?
फ्रॉड का खुलासा तब हुआ जब हरियाणा सरकार ने अपना खाता बंद कर फंड दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू की। इसी दौरान बैंक के रिकॉर्ड और सरकारी आंकड़ों में रकम का अंतर सामने आया। जांच में यही अंतर पूरे मामले की जड़ बना। बैंक ने यह भी कहा है कि गड़बड़ी कुछ खास सरकारी-लिंक्ड खातों तक सीमित थी और अन्य ग्राहकों के खातों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
फिलहाल, बाजार और निवेशकों की नजर जांच के नतीजों पर टिकी है। बैंकिंग व्यवस्था में भरोसा सबसे बड़ी पूंजी होता है, और इस घटना ने उस भरोसे को गहरी चोट पहुंचाई है।
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