Petrol : देशभर में E20 पेट्रोल की आपूर्ति बढ़ने के साथ वाहन चालकों के मन में यह सवाल भी उठने लगा है कि उनकी बाइक या कार में भराए गए पेट्रोल में वास्तव में कितना एथेनॉल मिला है। कई लोग यह भी जानना चाहते हैं कि कहीं निर्धारित सीमा से अधिक एथेनॉल तो नहीं मिलाया जा रहा। इसी बीच केंद्र सरकार एथेनॉल के उपयोग को केवल वाहनों तक सीमित न रखकर घरेलू रसोई तक पहुंचाने की तैयारी में भी जुट गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल और एथेनॉल को देखकर या सूंघकर अलग-अलग पहचानना संभव नहीं है, क्योंकि दोनों आपस में पूरी तरह घुल जाते हैं। हालांकि एक आसान परीक्षण के जरिए इसका अनुमान लगाया जा सकता है।
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इसके लिए किसी साफ कांच के बीकर या टेस्ट ट्यूब में 100 मिलीलीटर पेट्रोल लेकर उसमें 10 मिलीलीटर पानी मिलाएं। मिश्रण को अच्छी तरह हिलाने के बाद दो से तीन मिनट के लिए छोड़ दें। एथेनॉल पानी में घुलकर नीचे अलग परत बना लेता है। यदि नीचे की परत लगभग 30 मिलीलीटर तक पहुंच जाती है, तो समझा जाता है कि पेट्रोल में करीब 20 प्रतिशत एथेनॉल मौजूद है। यदि यह मात्रा इससे अधिक हो तो पानी या अन्य प्रकार की मिलावट की आशंका हो सकती है। केंद्र सरकार और तेल विपणन कंपनियों का कहना है कि फिलहाल केवल E20 मानक के अनुरूप पेट्रोल की ही आपूर्ति की जा रही है। यानी पेट्रोल में अधिकतम 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित है। इससे अधिक एथेनॉल मिलाने संबंधी दावों को कंपनियां भ्रामक बता रही हैं।
E20 के लिए उपयुक्त है या नहीं
वाहन मालिक अपनी बाइक या कार के फ्यूल कैप या यूजर मैनुअल में यह जानकारी देख सकते हैं कि वाहन E20 ईंधन के अनुकूल है या नहीं। अप्रैल 2023 के बाद निर्मित अधिकांश वाहनों पर ‘E20 Compatible’ का स्टिकर लगाया गया है। पुराने मॉडलों के लिए विशेषज्ञ नियमित सर्विसिंग के दौरान फ्यूल फिल्टर, रबर पाइप और गैस्केट की जांच कराने की सलाह देते हैं। जरूरत पड़ने पर उपयुक्त फ्यूल एडिटिव्स का भी उपयोग किया जा सकता है। यदि पेट्रोल की गुणवत्ता पर संदेह हो या निर्धारित मानक से अधिक एथेनॉल या पानी की आशंका लगे, तो उपभोक्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा संबंधित तेल कंपनी के ग्राहक सेवा केंद्र पर भी शिकायत की सुविधा उपलब्ध है।
नई नीति पर काम शुरू
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय एथेनॉल को घरेलू ईंधन के रूप में बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रहा है। प्रस्ताव के अनुसार भविष्य में विशेष एथेनॉल-आधारित कुकिंग स्टोव और सुरक्षित फ्यूल कंटेनर विकसित किए जाएंगे। इन्हें मौजूदा एलपीजी सिलेंडरों से अलग डिजाइन किया जाएगा। सरकार शुरुआती चरण में ऐसे चूल्हों पर सब्सिडी देने और घरेलू उपयोग के लिए एथेनॉल को किफायती बनाने पर भी विचार कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पेट्रोल पंपों और चुनिंदा रिटेल आउटलेट्स पर ‘एथेनॉल एटीएम’ स्थापित किए जा सकते हैं। यहां से उपभोक्ता विशेष कैनिस्टर में एथेनॉल भरवाकर घर ले जा सकेंगे और निर्धारित मानकों वाले चूल्हों में उसका उपयोग कर सकेंगे। यदि यह योजना लागू होती है तो स्वच्छ ईंधन के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जाएगा।
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